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एफडीए  आम जनता को स्वास्थ्य वर्धक व सुरक्षित भोजन मुहैया कराने को लेकर लगातार प्रयासरत – उत्तराखंड में खाद्य तेल के ‘री-यूज़’ पर कड़ी निगरानी

मुख्यमंत्री  धामी के दिशा-निर्देशों में स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त एफडीए डॉ. आर. राजेश के नेतृत्व में राज्य में तेज हुई मुहिम
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देशों व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में एफडीए  आम जनता को स्वास्थ्य वर्धक व सुरक्षित भोजन मुहैया कराने को लेकर लगातार प्रयासरत है। फूड डिलीवरी एप्स और रेडी-टू-ईट संस्कृति के इस दौर में घर में बना ताज़ा भोजन एक विकल्प से अधिक आदत और जिम्मेदारी दोनों है। लेकिन बदलती लाइफस्टाइल के चलते बड़ी आबादी बाजार के खाने पर निर्भर होती जा रही है। खासकर युवा पीढ़ी में बाहर के खाने का चलन तेज़ी से बढ़ा है, जिसका दुष्प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में एक बार इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल को पुनः पकाने में उपयोग करने की प्रवृत्ति आम होती जा रही है। शोध बताते हैं कि बार-बार गर्म किए गए तेल में हानिकारक रसायन बनते हैं, जो हृदय रोग, कैंसर और उच्च ट्रांस फैट जैसी स्थितियों का खतरा कई गुना बढ़ाते हैं। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण  ने वर्ष 2018 में देशव्यापी रिपरपज यूज्ड  कुकिंग ऑयल ( रूको ) मिशन की शुरुआत की। इसका उद्देश्य प्रयोग किए गए तेल को खाद्य श्रृंखला में वापस जाने से रोकना तथा उसे बायोफ्यूल जैसे गैर-खाद्य उपयोगों में परिवर्तित करना है।
अपर आयुक्त एफडीए ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार तेल को दुबारा गर्म करने पर उसमें एल्डिहाइड्स और अन्य जहरीले यौगिक तेजी से बनते हैं। इन रसायनों से शरीर की कोशिकाएं नष्ट होती हैं और कैंसर सहित कई बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा यह ट्रांस फैट की मात्रा में भी तीव्र वृद्धि करता है, जो हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का एक बड़ा कारण है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन  की 2022 की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शहरी भारत में लगभग 60 प्रतिशत खाना पकाने वाला तेल एक बार उपयोग होने के बाद भी दोबारा बिक्री या पुनः उपयोग के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में वापस आ जाता है। यह आंकड़ा स्वास्थ्य संकट की गंभीर चेतावनी है।
उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन आगामी वर्षों में इस मुहिम को और तीव्र गति से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। यह दून मॉडल ईट राइट इंडिया और रुको पहल के तहत विकसित एक अभिनव प्रणाली है, जिसकी सराहना भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी की। राज्य एफडीए अब इसे गढ़वाल और कुमाऊँ में चरणबद्ध तरीके से लागू करने जा रहा है। मॉडल का लक्ष्य खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और उपयोग किए गए खाना पकाने के तेल के सुरक्षित पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है।
इस प्रभावी पहल को आगे बढ़ाने में उप आयुक्त एवं नोडल अधिकारी  गणेश कंडवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनके नेतृत्व में यह मॉडल उत्तराखंड के लिए एक मिसाल बन रहा है।*******************************************
राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी स्थिति में जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस्तेमाल किए गए तेल का दोबारा उपयोग रोकने का अभियान केवल नियम लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सेहत बचाने का संकल्प है। उत्तराखंड ने रुको को न सिर्फ सफल बनाया है, बल्कि इसे सामाजिक जागरूकता की मुहिम में बदलकर देश के सामने एक नया मानक स्थापित किया है। हम इस अभियान को और व्यापक रूप में आगे बढ़ाएंगे, ताकि स्वस्थ उत्तराखंड का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सके।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में रुको मिशन को उत्तराखंड में मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि एक बार इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल किसी भी हालत में खाद्य श्रृंखला में वापस न जाए। इसके लिए फूड बिजनेस ऑपरेटरों, होटलों, रेस्टोरेंट्स, ढाबों और सभी खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आम जनता भी अब इस मुद्दे के प्रति अधिक संवेदनशील हो रही है। अगले चरण में हम तकनीकी निगरानी, बड़े पैमाने पर संग्रहण तंत्र और बायोफ्यूल निर्माण क्षमता को और मजबूत करेंगे। यह मुहिम केवल स्वास्थ्य सुरक्षा ही नहीं, पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ. आर. राजेश कुमार 
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त एफडीए 

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