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शेर-ओ-ग़ज़ल के शौकीनों को भा रहा दून पुस्तक महोत्सव- स्टॉल में सजे हैं शायरों के क़लाम

बच्चों की नज़्में व उर्दू में लिखा श्री हनुमान चालीसा
देहरादून । राजधानी के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित नौ दिवसीय 
देहरादून।दून पुस्तक महोत्सव इन दिनों किताबों के शौकीनों, कला और साहित्य प्रेमियों और देहरादून के सुधी पाठकों से गुलज़ार हो रहा है। कहानी, कविताएं, उपन्यास, इतिहास, नाटक, यात्रा संस्मरण, आत्मकथा, बाल साहित्य, गीत और गजल जैसे सहित्य की हर विधा में दस लाख से अधिक किताबें पाठकों के लिए किसी कौतुहल से कम नहीं है।
वैसे तो सुधी पाठक अपनी अभिरूचि के अनुसार किताबों खरीद रहे हैं। लेकिन बीते कुछ समय से युवा पीढ़ी में गजल और शेरो शायरी को लेकर जिस तरह दीवानगी देखने को मिल रही है, उससे युवा उर्दू साहित्य में शेर, गजल आदि में अभिरूचि दिखा रहे हैं। पुस्तक महोत्सव में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, राजकमल प्रकाशन और रेख़्ता प्रकाशन सहित अन्य प्रकाशकों के स्टॉल पर उर्दू साहित्य को लेकर युवाओं में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है।
शेर-ओ-शायरी के शौकीनों के लिए मिर्ज़ा ग़ालिब, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, दाग़, ज़ौक, मोमिन, इन्शा, फिराक़ गोरखपुरी, साहिर लुधियानवी, जॉन ऐलिया, राहत इंदौरी, मीर तकी मीर, गुलज़ार, हबीब जालिब, बशीर बद्र, परवीन शाकिर जैसे जाने माने शायरों के कलाम और दीवान मेले में उपलब्ध हैं। जॉन एलिया की ‘‘शायद’’ और ‘‘क्यों’’, ग़ालिब की ‘‘पूछते हैं कि ग़ालिब कौन है’’, फ़ैज़ की ‘‘गुलों में रंग भरे’’ एवं ‘‘क़ल्ब-ए-फ़ैज़’’ जैसी किताबें शेर व गजल के शौकीनों को खूब भा रही हैं।
जहां एक ओर ‘‘हर मौके के लिए शेर’’ जैसी किताब हर साहित्य प्रेमी के लिए संग्रहणीय है, वहीं बच्चों के लिए अजरा नकवी द्वारा संकलित ‘‘बच्चों की नज़्में’’ बच्चों में साहित्य की अभिरूचि पैदा करने के लिए सबसे मुफीद हो सकती है।
उर्दू पुस्तकों के संग्रह में ‘‘श्री हनुमान चालीसा – उूर्दू संस्करण’’ आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। इस पुस्तक में हनुमान चालीस के दोहे हिंदी, अंग्रेजी और उूर्दू तीनों भाषाओं में संकलित किये गये हैं। इसे संजीव सराफ और फरहत एहसास द्वारा लिखा गया है।
पुस्तक मेले में विभिन्न प्रकाशकों के 300 से अधिक बुक स्टॉल : मलिक
दून पुस्तक महोत्सव के आयोजक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने जानकारी दी कि पुस्तक मेले में विभिन्न प्रकाशकों के 300 से अधिक बुक स्टॉल लगाये गये हैं। पुस्तक मेले में सभी कला-साहित्य प्रेमियों के लिए लिए प्रवेश निःशुल्क है। ऑनलाईन पंजीकरण करने पर पुस्तकों के मूल्य में छूट भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पाठकगण एन.बी.टी. की ओर से संचालित राष्ट्रीय पुस्तकालय एप को भी डाउनलोड कर सकते हैं। जिसमें विभिन्न भाषाओं की हजारों पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध हैं।

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