उत्तराखण्डनैनीताल

प्रतिभा दिखाने का मंच – कुमाऊँ मंडल में सांस्कृतिक दलों के पंजीकरण प्रक्रिया की शुरुआत, 30 मई तक होंगे मंडल के 6 जनपदों के ऑडिशन : केएस चौहान

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक केएस चौहान की निगरानी में हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज में लिए गए ऑडिशन,
पंजीकरण प्रक्रिया के पहले दिन उधमसिंह नगर के 27 सांस्कृतिक दल पहुंचे

हल्द्वानी। सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग की और से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं नीतियों का विभागीय गीत नाट्य योजना के तहत पंजीकृत सांस्कृतिक दलों के माध्यम से प्रचार प्रसार किया जाता है। इसके लिए सूचना विभाग राज्य के सांस्कृतिक दलों को पंजीकृत करने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। जिसके तहत सोमवार को हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में सांस्कृतिक दलों का ऑडिशन कार्यक्रम शुरू हुआ है। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग देहरादून से आए संयुक्त निदेशक  केएस चौहान ने कहा कि सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग राज्य सरकार की योजनाओं उपलब्धियों का प्रचार प्रसार विभिन्न माध्यमों से करता है। इस मौके पर जिला सूचना अधिकारी नैनीताल गिरिजा जोशी, उधम सिंह नगर गोविन्द बिष्ट, व्यवस्था अधिकारी सूचना विभाग रामपाल सिंह रावत सहित विभाग के अन्य अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।

 हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में 30 मई तक चलेगा ऑडीशन : केएस चौहान
उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर पंजीकृत लोक गीत, लोक नृत्य, कठपुतली, कब्बाली, भजन, नाटक, नुक्कड़ नाटय दलों के पंजीकरण से शासन की नीतियों निर्णयों और उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार का कार्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से किये जाने के साथ ही युवाओं को भी इससे अपनी लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। सांस्कृतिक दलों की चयन प्रक्रिया में संस्कृति के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं वरिष्ठ संस्कृति व रंग कर्मी अनिल घिल्डियाल घनश्याम भट्ट, केन्द्रीय संचार ब्यूरो से श्रद्धा गुरुरानी, भारतखंडे अल्मोड़ा से सुनील कुमार एवं सूचना अधिकारी हल्द्वानी मीडिया सेंटर प्रियंका जोशी शामिल है। मंगलवार 27 मई को पिथौरागढ़ एवं चम्पावत जिले के दलों का, 28 मई को बागेश्वर, 29 मई को अल्मोड़ा तथा 30 मई को नैनीताल जिले के सास्कृतिक दलों का ऑडीशन होगा।
राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विभागीय गीत एवं नाट्य योजना अंतर्गत विभाग में पंजीकृत इन सांस्कृतिक दलों के माध्यम से सरकार की योजनाओं, नीतियों, निर्णयों एवं उपलब्धियों को आम जनता तक आसानी से पंहुचाने के लिए सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं। इस योजना से एक और राज्य की अपनी लोक संस्कृति को सहेजने और संजोने का कार्य हो रहा है। वहीं स्थानीय प्रतिभाओं को आगे आने का भी अवसर मिल रहा है साथ ही उन्हें रोजगार भी मिल रहा है।

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