उत्तराखण्डदेहरादून

पूर्व मुख्य सचिव एन.एस.नपलच्याल व केएस चौहान ने किया  केशर सिंह राय की पुस्तक लोकगीत: सांस्कृतिक विरासत एवं लोक गाथाएं” का विमोचन

देहरादून । केशर सिंह राय ग्राम गमरी  की लिखी गई पुस्तक”लोकगीत: सांस्कृतिक विरासत एवं लोक गाथाएं” का विमोचन भारतीय मृदा एवं जल  संरक्षण संस्थान देहरादून में किया गया। लोकगीत पुस्तक विमोचन के मुख्य अतिथि  एन.एस.नपलच्याल पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखंड,विशिष्ट अतिथि डॉ. के.आर. नौटियाल  पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक भारतीय कास्ट गार्ड एवं डॉ  एम.मधु  निदेशक भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून ने किया ।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता मूरत राम शर्मा अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग उत्तराखण्ड के द्वारा की गई । पुस्तक लोकगीत में जौनसार बावर, सिरमौर जौनपुर तथा जौनसार परिक्षेत्र की पौराणिक लोक गाथाओं, वीर गाथाओं, छोड़े भारत,पाण्डवाणी गाथाओं,मण्डावणें ,जांगू -बाजू,बुझावणी,अनावणें तथा कहावतें इत्यादि विषयों को प्रमुखता के साथ वर्णन किया गया है।
पुस्तक चार महासू महाराज  एवं कुल देवता कुकुरसी महाराज  से प्रारम्भ की गई है। पुस्तक में  पौराणिक गाथाओं में देवगीत सुने हरियाडी़,सीता हरण, पौराणिक गीत केदार बाछा,लोक प्रसिद्ध गीत बिरुडी़ , पाण्डवाणी गाथाएं , लोकगीत मण्डवाणें, कुन्ती माता की गाथा, कौरवों पाण्डवों आथा तथा प्रमुख छोड़े भारत,अनावणें इत्यादि विषयों को पुस्तक का आधार बनाया गया है। पुस्तक में जौनसार बावर के आधुनिक गीतकार व गायकों के समाज हित के प्रसिद्ध गीतों को प्रमुखता से स्थान दिया है।इस अवसर पर जौनसार बावर के बड़े पदों पर सेवारत अधिकारी, शिक्षकों, गीतकार, लोक गायकों, साहित्यकार, कवि गण उपस्थित रहें।
कार्यक्रम में के.एस. चौहान, जगत सिंह चौहान, रणबीर सिंह तोमर, चतर सिंह चौहान, रघुवीर सिंह तोमर, टीकम सिंह चौहान,  कुन्दन सिंह राठौर, महावीर सिंह चौहान, विपिन शर्मा ,
सुनीता चौहान, शांति वर्मा, सीता राम चौहान, श्याम सिंह चौहान, आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन  रणवीर सिंह तोमर ने किया।
जौनसार बावर की अच्छाइयों पर कम लिखा गया:  चौहान 
मुख्य अतिथि शश एन एस नपलच्याल  ने कहा कि जौनसार बावर का लोक साहित्य पौराणिक हैं तथा अपनी संस्कृति के विषयों पर लिखना बहुत अच्छा प्रयास है और आगे भी इस पर लेखन कार्य जारी रखना चाहिए।आने वाली पीढ़ी के लिए मिल का पत्थर साबित होगा। विशिष्ट अतिथि डॉ के आर नौटियाल ने कहा कि जौनसार बावर का लोक साहित्य श्रुति पर आधारित था अब इसको लिपिबद्ध किया जा रहा है ,यह उल्लेखनीय है। यह पुस्तक समाज में आने वाली पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का काम करेगी। कलम सिंह चौहान ने कहा  कि जौनसार बावर की अच्छाइयों पर कम लिखा गया और बाहरी लोगों के द्वारा गलत चीजों पर प्रकाश डाला गया है। इसके पीछे मुख्य कारण यह रहा कि जौनसार बावर में लेखन व पत्रकारिता में कम लोग थे।

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