उत्तराखण्डदेहरादून

बाल आयोग अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने कहा- हरेला उत्तराखण्ड की परंपरा, संस्कृति और प्रकृति प्रेम का प्रतीक पर्व

बाल आयोग अध्यक्ष के नेतृत्व में मनाया गया हरेला पर्व ,
प्रदेशवासियों से की पेड़ लगाकर पर्यावरण को बचाने की अपील
देहरादून।उत्तराखण्ड बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की  अध्यक्ष डा गीता खन्ना के नेतृत्व में आयोग के सचिव डा शिव कुमार बरनवाल, अनुसचिव डा सतीश कुमार सिंह व कर्मचारियों ने हरेला पर्व मनाया ।
हरेला पर्व के अवसर पर  आयोग अध्यक्ष ने सभी से अपने घरों व आस-पास के स्थानों पर वृक्षारोपण करने तथा पर्यावरण को प्रदुषण मुक्त बनाये जाने की अपील की ।
इस मौके पर डॉ गीता खन्ना ने कहा कि
हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह प्रकृति से हमारे जुड़ाव और जिम्मेदारी का उत्सव है। हमें केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि उनकी देखभाल का भी संकल्प लेना होगा।
उन्होंने कहा कि हरेला उत्तराखण्ड की परंपरा, संस्कृति और प्रकृति प्रेम का प्रतीक पर्व है, जो हमें हरियाली से जुड़ने और पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।
डॉ गीता खन्ना ने कहा कि हरेला हमारे जीवन में हरियाली, समृद्धि और शांति लाने वाला पर्व है। यह हमें पेड़-पौधों, जल, जमीन और पर्यावरण से जुड़ने का अवसर देता है। हम सभी को मिलकर इस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है, ऐसे समय में हरेला पर्व हमें एकजुट होकर प्रकृति की रक्षा करने का संदेश देता है।

बाल आयोग अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  की पहल ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ की सराहना करते हुए सभी से अपील की कि हरेला पर्व पर एक-एक पेड़ अवश्य लगाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों, युवाओं और महिलाओं को इस पर्व से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण को एक जन-आंदोलन का रूप देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि‘‘हमारी जड़ें प्रकृति में हैं। हरेला हमें अपनी जड़ों को पहचानने और हरियाली को अपनाने का संदेश देता है। डॉ गीता खन्ना ने कहा कि हम सभी इस पर्व पर पर्यावरण को बचाने का संकल्प लें।’’

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