उत्तराखंड की महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए फिक्की फ्लो प्रतिबद्ध : डॉ. गीता खन्ना

स्थानीय उद्यमियों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया,
फिक्की फ्लो उत्तराखंड का “फाउंडर्स वॉर रूम” स्टार्टअप ऊर्जा से हुआ रोशन,आयोजन में लगभग 100 उत्साही उद्यमियों, संस्थापकों और स्टार्टअप इकोसिस्टम भागीदारों ने भाग लिया
देहरादून। कौन-सा संस्थापक सबसे बेहतरीन पिच करता है? यही सवाल फिक्की फ्लो उत्तराखंड की और से आयोजित “फाउंडर्स वॉर रूम” कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु बना रहा ।
यह आयोजन डॉ. गीता खन्ना, अध्यक्षा, फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर 2025–26 के नेतृत्व में यूएफसी दून के सहयोग से, संपन्न हुआ। इस आयोजन में लगभग 100 उत्साही उद्यमियों, संस्थापकों और स्टार्टअप इकोसिस्टम भागीदारों ने भाग लिया, जो उत्तराखंड की उभरती स्टार्टअप प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए एकत्र हुए थे।
इस कार्यक्रम का संचालन फ्लो उत्तराखंड स्टार्टअप सेल की इनिशिएटिव लीड अनुराधा डोवल ने किया, जबकि मंच संचालन क्षितिज डोवल, संस्थापक एवं सीईओ, उनहू इनोवेशन सेंटर ने संभाला। क्षेत्र के कुछ सबसे प्रतिभाशाली उद्यमी दिमागों को एक मंच पर लाकर उनके नवाचार विचारों की प्रस्तुति का अवसर प्रदान किया, जहां वे “सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप पिच” का खिताब जीतने की दौड़ में शामिल हुए।प्रारंभिक राउंड में संस्थापकों ने अपने बिजनेस मॉडल और समाधान प्रस्तुत किए, जिसके बाद अंतिम राउंड आयोजित हुआ।
डॉ. गीता खन्ना, नेहा जोशी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा एवं सामाजिक कार्यकर्ता विपुल दावर, पूर्व अध्यक्ष, सीआईआई उत्तराखंड एवं प्रबंध निदेशक, इंडो-जर्मन ब्रेक्स
डॉ. दीपक मुरारी, संयुक्त निदेशक, उद्योग निदेशालय उत्तराखंड एवं प्रभारी, स्टार्टअप उत्तराखंड सेल
कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण “सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप पिच” पुरस्कार अविनाश मिश्रा को प्रदान किया गया। उन्हें फ्लो ट्रॉफी एवं एक पुरस्कार भेंट कर उनके शानदार पिच और उद्यमशीलता भावना का सम्मान किया गया।
डॉ. गीता खन्ना ने फ्लो उत्तराखंड की महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्यमियों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, “यह मंच स्टार्टअप्स को वह मंच देने के लिए है जिसके वे हकदार हैं — जहां वे चमक सकें, जुड़ सकें और आगे बढ़ सकें।”
अनुराधा डोवल ने कहा, “हमें यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि उत्तराखंड में ही इतनी प्रतिभा और जुनून मौजूद है। ऐसे आयोजन संस्थापकों के लिए दृश्यता और मार्गदर्शन प्राप्त करने का पहला कदम हैं।”





