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मुख्य सेवक सदन में 300 वीं जयंती पर कार्यक्रम हुआ आयोजित, सीएम पुष्कर धामी ने कहा – सनातन संस्कृति को अहिल्याबाई होल्कर ने एक सूत्र में पिरोया

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित कई नेता हुए शामिल
देहरादून।सनातन संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने वाली अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर सीएम आवास के मुख्य सेवक सदन में शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में त्याग, सेवा और समर्पण की प्रतिमूर्ति अहिल्याबाई होल्कर को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने करुणा, सेवा और धर्मनिष्ठा से भारतीय इतिहास में अद्वितीय स्थान प्राप्त किया। उन्होंने शासन को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा, न्याय और धर्म की पुनर्स्थापना का साधन बनाया। उन्होंने काशी विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ, द्वारका से लेकर रामेश्वरम, अयोध्या और मथुरा के साथ ही हमारी देवभूमि के बद्रीनाथ, केदारनाथ और हरिद्वार में मंदिरों और घाटों का जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई धर्मशालाओं और रास्तों के निर्माण के साथ ही जनसेवा के अनेक कार्य कराएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने भारत में धर्मस्थलों का पुनर्निर्माण कर भारत की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उन्होंने संपूर्ण भारत की सनातन संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। उन्होंने उस कालखंड में नारी सशक्तिकरण की ऐसी अनुपम मिसाल प्रस्तुत की, जिसकी कल्पना कर पाना भी उस समय कठिन था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के अमृत काल में प्रवेश कर चुका है। वर्षों तक उपेक्षित रहे हमारे गौरवशाली इतिहास, महान राष्ट्र नायकों के योगदान और सांस्कृतिक विरासत को आज न केवल पुनर्स्थापित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय चेतना का आधार भी बनाया जा रहा है।इस अवसर पर भाजपा महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार ,
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक शैलेन्द्र सिंह बिष्ट गढ़वाली , महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव दीप्ति रावत भारद्वाज सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले समाजसेवी , दायित्वधारी सहित भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
तीक्ष्ण सोच और स्वत:स्फूर्त शासक थी अहिल्याबाई: विनोद तावड़े
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने महारानी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर देहरादून के मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में पुण्यश्लोक महारानी अहिल्याबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महारानी अहिल्याबाई प्रसिद्ध सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव की पत्नी थी। अहिल्याबाई किसी बड़े राज्य की रानी नहीं थी। उनका कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत सीमित था। फिर भी उन्होंने जो कुछ किया, उससे आश्चर्य होता है। उनका जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के छौंड़ी गाँव में हुआ। उस समय महिलाये स्कूल नहीं जाती थीं, लेकिन अहिल्याबाई के पिता ने उन्हें लिखने -पढ़ने के लिए प्रेरित कर पढ़ाया।
अहिल्याबाई उत्तराखंड से भी है बड़ा गहरा रिश्ता: महेंद्र भट्ट
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने अपने संबोधन में कहा कि महारानी अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर भारत-भर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में मंदिर बनवाए, घाट बंधवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया, मार्ग बनवाए-सुधरवाए, भूखों के लिए अन्नक्षेत्र खोले, प्यासों के लिए प्याऊ बनाये , मंदिरों में विद्वानों की नियुक्ति की। उनका उत्तराखंड से भी बड़ा गहरा रिश्ता है ।उन्होंने अपने शासनकाल में केदारनाथ बद्रीनाथ और उत्तराखंड के तमाम विभाग में धर्मशालाएं बनाने का काम किया और गोचर जैसी नैसर्गिक सुंदर स्थल को गोचर नाम भी उन्होंने ही दिया।
देहरादून।सनातन संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने वाली अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर सीएम आवास के मुख्य सेवक सदन में शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में त्याग, सेवा और समर्पण की प्रतिमूर्ति अहिल्याबाई होल्कर को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने करुणा, सेवा और धर्मनिष्ठा से भारतीय इतिहास में अद्वितीय स्थान प्राप्त किया। उन्होंने शासन को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा, न्याय और धर्म की पुनर्स्थापना का साधन बनाया। उन्होंने काशी विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ, द्वारका से लेकर रामेश्वरम, अयोध्या और मथुरा के साथ ही हमारी देवभूमि के बद्रीनाथ, केदारनाथ और हरिद्वार में मंदिरों और घाटों का जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई धर्मशालाओं और रास्तों के निर्माण के साथ ही जनसेवा के अनेक कार्य कराएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने भारत में धर्मस्थलों का पुनर्निर्माण कर भारत की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उन्होंने संपूर्ण भारत की सनातन संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। उन्होंने उस कालखंड में नारी सशक्तिकरण की ऐसी अनुपम मिसाल प्रस्तुत की, जिसकी कल्पना कर पाना भी उस समय कठिन था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के अमृत काल में प्रवेश कर चुका है। वर्षों तक उपेक्षित रहे हमारे गौरवशाली इतिहास, महान राष्ट्र नायकों के योगदान और सांस्कृतिक विरासत को आज न केवल पुनर्स्थापित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय चेतना का आधार भी बनाया जा रहा है।इस अवसर पर भाजपा महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार ,
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक शैलेन्द्र सिंह बिष्ट गढ़वाली , महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव दीप्ति रावत भारद्वाज सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले समाजसेवी , दायित्वधारी सहित भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
तीक्ष्ण सोच और स्वत:स्फूर्त शासक थी अहिल्याबाई: विनोद तावड़े
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने महारानी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर देहरादून के मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में पुण्यश्लोक महारानी अहिल्याबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महारानी अहिल्याबाई प्रसिद्ध सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव की पत्नी थी। अहिल्याबाई किसी बड़े राज्य की रानी नहीं थी। उनका कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत सीमित था। फिर भी उन्होंने जो कुछ किया, उससे आश्चर्य होता है। उनका जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के छौंड़ी गाँव में हुआ। उस समय महिलाये स्कूल नहीं जाती थीं, लेकिन अहिल्याबाई के पिता ने उन्हें लिखने -पढ़ने के लिए प्रेरित कर पढ़ाया।
अहिल्याबाई उत्तराखंड से भी है बड़ा गहरा रिश्ता: महेंद्र भट्ट
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने अपने संबोधन में कहा कि महारानी अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर भारत-भर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में मंदिर बनवाए, घाट बंधवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया, मार्ग बनवाए-सुधरवाए, भूखों के लिए अन्नक्षेत्र खोले, प्यासों के लिए प्याऊ बनाये , मंदिरों में विद्वानों की नियुक्ति की। उनका उत्तराखंड से भी बड़ा गहरा रिश्ता है ।उन्होंने अपने शासनकाल में केदारनाथ बद्रीनाथ और उत्तराखंड के तमाम विभाग में धर्मशालाएं बनाने का काम किया और गोचर जैसी नैसर्गिक सुंदर स्थल को गोचर नाम भी उन्होंने ही दिया।





