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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की मसूरी स्थित LBSNAA  के फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में शिरकत, कहा -सिविल सेवा केवल एक ट्रेनिंग मॉड्यूल नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए समर्पण का संकल्प

अधिकारियों को मानवीय नेतृत्व, ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण का मंत्र दिया,
कहा – इस फाउंडेशन कोर्स का असली मकसद ‘कमिटमेंट टू बिल्ड ए गवर्नेंस सिस्टम
देहरादून/ मसूरी।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी के फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में शिरकत की। इस दौरान अपने संबोधन   में राजनाथ सिंह ने कहा कि ट्रेनिंग अफसर को बड़ी कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है, उन्होंने कहा कि जैसे जैसे आप सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे तब आपको इसकी गंभीरता समझ में आएगी।
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के फाउंडेशन कोर्स समापन समारोह में ट्रेनिंग अफसर को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इस फाउंडेशन कोर्स का असली मकसद ‘कमिटमेंट टू बिल्ड ए गवर्नेंस सिस्टम’ है। उन्होंने अधिकारियों को मानवीय नेतृत्व, ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण का मंत्र दिया। रक्षा मत्री ने कहा कि सिविल सेवा केवल एक ट्रेनिंग मॉड्यूल नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए समर्पण का संकल्प है। ये अकादमी वो स्थान है, जहां भारत की प्रशासनिक रीढ़ तैयार होती है और जहां से नेशन बिल्डिंग की यात्रा का पहला सार्थक कदम उठाया जाता है।
उन्होंने अधिकारियों को सावधान करते हुए कहा कि अगर उनमें ‘अहंकार आया तो आपकी कीमत अपने आप कम हो जाएगी’। इसलिए पद चाहे कितना भी बड़ा हो यदि अहंकार ने छूआ तो वैल्यू अपने आप खत्म हो जाएगी। उन्होंने सभी नवनियुक्त अधिकारियों से मानवता के साथ नेतृत्व करने की सलाह दी। इसलिए सिविल सेवा चुनी है तो मतलब आप केवल खुद के लिए नहीं, देश के लिए सोचते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का युवा उच्च वेतन वाली नौकरियों में जा सकता था, लेकिन सिविल सेवा चुनने वालों ने यह सिद्ध किया है कि उनकी प्रेरणा सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए कुछ सार्थक करना भी है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का सामाजिक और आर्थिक ढांचा तेजी से बदला है।आईटी, इंजीनियरिंग, मेडिकल और सर्विस सेक्टर में नए अवसर बढ़े हैं, स्टार्टअप संस्कृति मजबूत हुई है और फिर भी सिविल सेवा का आकर्षण बरकरार है।
आईएएस केवल नीतियां नहीं बनाता, देश का भविष्य  करता है तय : रक्षा मंत्री 
राजनाथ सिंह ने कहा कि अधिकारी न केवल नीति तैयार करते हैं, बल्कि उसे धरातल पर उतारने का काम भी करते हैं, इसलिए उनका हर निर्णय भारत के भविष्य को प्रभावित करता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि, आज सिविल सर्विसेज का अर्थ बदल चुका है. अधिकारी अब नौकरशाह नहीं, बल्कि जनसेवक माने जाते हैं. उन्होंने अधिकारियों को नीतियों और ईमानदारी की वैल्यू समझाते हुए कहा कि, उनके सेवा काल में कई लोग उनको रिश्वत देने की कोशिश करेंगे, लेकिन यदि उनका फैसला दृढ़ है तो इसको ठुकराकर उनको संतोष मिलेगा जो मां के सुख जैसा पवित्र होगा।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अधिकारियों ने मॉक ड्रिल्स को सफल बनाकर जनता को समय पर जागरूक किया। इसी तरह सभी को भविष्य में होने वाली ऐसी किसी भी स्थिति के लिए अपने आप को मानसिक रूप से तैयार रखना है।
कहा -आज की बेटियां कर रहीं कमाल
रक्षा मंत्री ने कहा आज की बेटियां कमाल कर रहीं हैं। जल्द ही सिविल सर्विसेज में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर होगी।उन्होंने कहा कि हमारी नारी शक्ति देश के विकास में योगदान देने को तैयार हैं। इस वर्ष की वैलिडिक्शन सेरेमनी में टॉप फाइव में तीन और टॉप 25 में 11 महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक सिविल सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर होगी और कई महिलाएं कैबिनेट सचिव जैसे सर्वाेच्च पद भी संभालेंगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत इस समय विकास के पथ पर अग्रसर है।अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आज भारत की बातों को गंभीरता से लिया जाता है। भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की इकोनमी तेजी से बढ़ रही है।उसे देखते हुए युवाओं के अंदर उत्साह होना बहुत जरूरी है। हम यदि सही मायनों में भारत को विकसित बनाना चाहते हैं, तो हमें यह तय करना होगा कि समाज का हर वर्ग इस विकास यात्रा में समान भागीदारी निभाए। राजनाथ सिंह ने कहा सिविल सर्वेंट लोगों की दिशा को निर्धारित करता है।
सोशल मीडिया से ज्यादा अपने काम पर ध्यान देने की दी नसीहत 
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया से पब्लिसिटी तो जल्दी हो सकती है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम नहीं होेते। इसलिए लोगों के दिल में जगह बनानी है तो सोशल मीडिया से ज्यादा अपने काम पर ध्यान देना होगा। राजनाथ सिंह ने सरदार पटेल का उदाहरण देते हुए कहा कि, ‘नागरिकों को अपने से अलग मत समझो. सच्ची लोक सेवा निष्पक्षता, विनम्रता और उच्च स्तर की ईमानदारी से ही संभव है’।उन्होंने कहा कि यूपीएससी अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, जो किसी भी संस्था के लिए गौरव का विषय है। इसके माध्यम से देश को श्रेष्ठ प्रशासनिक नेतृत्व मिलता रहा है।

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