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महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय के बेसमेंट में जलभराव पर जांच को सचिव स्वास्थ्य ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट की तलब

कहा -जलभराव से विभाग की छवि धूमिल, संक्रमण और दुर्घटना का खतरा
देहरादून।पंडित दीनदयाल उपाध्याय (कोरोनेशन) जिला चिकित्सालय देहरादून  की ईकाई महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय, देहरादून की बेसमेंट पार्किंग में लंबे समय से बने जलभराव की स्थिति को लेकर  स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा मामले में जांच समिति गठित कर तीन दिनों में विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के अनुसार यह स्थिति न केवल मरीजों, आगंतुकों और कर्मचारियों के लिए अत्यधिक असुविधाजनक है, बल्कि गंभीर सुरक्षा और स्वच्छता खतरे भी उत्पन्न कर रही है। लंबे समय तक खड़ा पानी मच्छरों व अन्य कीटों के लिए प्रजनन स्थल बनता है, जिससे अस्पताल परिसर में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। सचिव ने यह भी कहा जलभराव वाले क्षेत्र फिसलन के कारण दुर्घटनाओं को जन्म दे सकते हैं। यह अस्पताल संचालन में बाधा पहुंचाने वाली लापरवाही है, जिसकी किसी भी स्तर पर अनदेखी नहीं की जा सकती।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सचिव द्वारा निम्नलिखित अधिकारियों की एक तीन-सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है , जिसमें डॉ. सुनीता टम्टा, प्रभारी महानिदेशक अध्यक्ष,
डॉ. शिखा जंगपांगी, निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य सदस्य,
डॉ. अजीत मोहन जौहरी, संयुक्त निदेशक को सदस्य बनाया गया है। यह समिति संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर, तीन दिवस के भीतर विस्तृत और सुस्पष्ट जाँच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएगी।
सीएमओ व  पीएमएस  से भी जवाब-तलब
प्रकरण में देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक से भी तीन दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि यदि समय सीमा के भीतर उत्तर प्राप्त नहीं हुआ, तो संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वच्छता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा प्रदेश में स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे अभियान में इस प्रकार की लापरवाही न केवल शासन की छवि को प्रभावित करती है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ करती है। स्वास्थ्य संस्थानों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है कि वे स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित करें।

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