उत्तराखण्डदेहरादूनराजनीति

युवा आंदोलन के पीछे कांग्रेसी षड्यंत्र  की आशंका: विनोद चमोली

कहा – युवाओं के आंदोलन में जो नारे लगाए जा रहे , वह खुद लगाते आए हैं राहुल गांधी, राष्ट्रभक्तों के प्रदेश में ऐसे नारों का लगाया जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा 
देहरादून । भाजपा के वरिष्ठ नेता, विधायक और राज्य आंदोलनकारी  विनोद चमोली ने युवा आंदोलन के पीछे कांग्रेसी षड्यंत्र का अंदेशा जताया है। उन्होंने कहा कि जो नारे वहां लगाए जा रहे हैं, उनसे मिलते जुलते नारे राहुल गांधी स्वयं लगाते आए हैं और उनके बड़े स्थानीय नेता तो स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि हम ही इन नारों के जनक हैं। उसमें भी सबसे दुर्भाग्यपूर्ण  कश्मीर की घाटी से शुरू हुए देश विरोधी नारों का सैन्य भूमि से लगाया जाना है।

उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वर्तमान में इस पूरे प्रकरण पर न्यायिक जांच चल रही है और इसके नतीजों का सभी को इंतजार करना चाहिए। लेकिन जहां तक सवाल है सीबीआई जांच का तो हमारी पार्टी और सरकार को सीबीआई जांच या किसी भी अन्य जांच से कोई दिक्कत नहीं है। दअरसल हमारी असल चिंता , युवाओं के भविष्य से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया बाधित होने से है। क्योंकि सभी जानते हैं कि सीबीआई जांच के बाद तमाम भर्ती प्रक्रियाएं एक दो साल के लिए रुक जाएंगे। ऐसे में प्रदेश के युवाओं का भविष्य और उनका अमूल्य समय बेकार चल जाएगा। फिलहाल हम इसके तमाम तकनीकी पहलुओं और प्रभावों का विशेषण कर रहे हैं। ताकि ऐसे किसी भी निर्णय से युवाओं की प्रगति बाधित न हो।
उन्होंने युवाओं से भी आग्रह किया कि उन्हें सरकार पर भरोसा करना चाहिए। क्योंकि जैसे ही जानकारी प्राप्त हुई तत्काल कार्रवाई की गई, गिरफ्तारियां भी हुई है और न्यायिक जांच की घोषणा भी। अभी 1 महीने का समय दिया गया है सच सामने लाने का और जैसे ही सही तथ्य सामने आ जाएंगे दूसरों पर कठोर ऐक्शन लिया जाएगा।
उन्होंने इस पूरे आंदोलन को लेकर चिंता जताई कि जिस तरह की नारेबाजी वहां की जा रही है वह कांग्रेस की भागीदारी को स्पष्ट करता है। वहां पेपर चोर गद्दी छोड़ के जो नारे लग रहे हैं वह पूरी तरह वही है जो कांग्रेस के राहुल गांधी लगातार अपनी सभा में प्रधानमंत्री पर लगाते रहे हैं। पहले वह चौकीदार चोर के नारे लगाते थे फिर वोट कर के नारे लगा रहे हैं और कांग्रेस के स्थानीय नेता हरक सिंह रावत का तो दावा है कि पेपर चोर गद्दी छोड़ का नारा तो उन्होंने स्वयं दिया है। इसी तरह उनके नेता  वहां जाते हैं और पेपर चोर के नारे लगवाते हैं। तो इसके पीछे संदेह होता है कि कहीं ना कहीं इस पूरे आंदोलन के पीछे कांग्रेस राजनीति कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के अतिरिक्त यूकेडी एवं तमाम पार्टियों इस मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेक रही हैं। लेकिन सबसे अधिक खतरनाक बात है उत्तराखंड के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के लोगों का इसमें शामिल होना है। क्योंकि आजादी के यह नारे सबसे पहले कश्मीर के आतंकवाद में लगे थे जिसे कम्युनिस्ट पार्टी ने जेएनयू में दोहराया और अब उत्तराखंड की जमीन से ऐसे नारों का लगाया जाना बहुत ही चिंताजनक है। यह सब लगातार जनता द्वारा नकारे गए राजनीतिक दल हैं और किसी भी कीमत पर सत्ता में दोबारा वापस आना चाहते हैं। सैनिक बहुल राज्य होने के कारण हमारी पहचान देवभूमि के साथ वीर भूमि की भी है। लिहाजा राष्ट्रभक्तों के प्रदेश में ऐसे नारों का लगाया जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button