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Good News – उत्तराखण्ड में राफ्टिंग को मिलेगा नया आयाम- जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान 900 गाइडों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

सचिव पर्यटन की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में सुरक्षा व सुविधाओं पर लिए गए बड़े फैसले 

देहरादून। उत्तराखंड में राफ्टिंग पर्यटन की संभावनाओं को सुदृढ़ और व्यवस्थित करने के उद्देश्य से सोमवार को सचिव पर्यटन व मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राफ्टिंग एसोसिएशन, राफ्टिंग गाइड एसोसिएशन, तकनीकी व विनियामक समिति, गंगा नदी राफ्टिंग समिति सहित सभी संबंधित हितधारक मौजूद रहे।
बैठक में सबसे पहले राफ्टिंग गाइडों की सुरक्षा और तकनीकी दक्षता को लेकर चर्चा हुई। सचिव पर्यटन ने स्पष्ट किया कि राफ्टिंग के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए गाइडों का फर्स्ट एड और सीपीआर में दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है।  पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार के साथ कार्यरत मोंटाना (यूएसए) से संबद्ध संस्था के माध्यम से तीन दिवसीय वाइल्डरनेस फर्स्ट एड (डब्ल्यूएफए) प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह प्रशिक्षण जनवरी 2026 के प्रथम सप्ताह से शुरू होगा। इसके तहत जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान राफ्टिंग से जुड़े लगभग 900 गाइडों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
राफ्टिंग एसोसिएशन ने बैठक में कई अहम मुद्दे उठाए, जिनमें नदी तटों पर राफ्टिंग कैंपों की पुनः स्थापना, गंगा नदी की वहन क्षमता का पुनर्मूल्यांकन, मुख्य मार्ग से राफ्टिंग पिकअप प्वाइंट में सुधार और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था शामिल रही। सचिव पर्यटन ने इन सभी समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
बैठक में राफ्टिंग गाइड एसोसिएशन की मांग पर गाइडों की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने पर सहमति बनी। इसके साथ ही गंगा नदी राफ्टिंग समिति द्वारा लिए जाने वाले शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
धीराज सिंह गर्ब्याल ने गंगा नदी राफ्टिंग समिति के सचिव सहित सभी संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए। बैठक में उप निदेशक पर्यटन अमित लोहनी, वरिष्ठ साहसिक खेल अधिकारी एवं गंगा नदी राफ्टिंग समिति के सचिव जसपाल सिंह चौहान, साहसिक खेल अधिकारी सीमा नौटियाल, थल क्रीड़ा विशेषज्ञ भूपेंद्र सिंह, राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष रामपाल सिंह, तकनीकी समिति के सदस्य अरविंद भारद्वाज, विनियामक समिति के सदस्य मंजूल रावत, ध्रुवनाथ राणा आदि मौजूद रहे।

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