350 करोड़ की केंद्रीय योजनाओं से राज्य पर्यटन अवसंरचना हो रही सुदृढ़ , पहाड़ों में पर्यटन अवसंरचना और सुविधाओं में सुधार केंद्र की प्राथमिकता

राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के सदन में उठाए सवाल के जवाब में सरकार ने दी जानकारी
देहरादून । केंद्र सरकार, उत्तराखंड में 350 करोड़ के निवेश से विभिन्न योजनाओं द्वारा पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ कर रही है। राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा सदन में उठाए सवाल के जवाब में सरकार ने पहाड़ों में पर्यटन स्थलों की अवसंरचना, सड़क तथा अंतिम छोर तक संपर्क व्यवस्था, मार्ग-संकेतक, पार्किंग, स्वच्छता, डिजिटल संपर्क व्यवस्था सहित पर्यटकों से जुड़ी अन्य सुविधाओं में सुधार को महत्वपूर्ण माना है।
राज्यसभा के पटल पर जवाब देते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्वीकारा कि पर्वतीय और सीमावर्ती राज्यों में, पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ करने और सड़क तथा अंतिम छोर तक संपर्क व्यवस्था, मार्ग-संकेतक, पार्किंग, स्वच्छता, डिजिटल संपर्क व्यवस्था सहित पर्यटकों से जुड़ी अन्य सुविधाओं में सुधार महत्वपूर्ण है। ताकि पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाया जा सके, स्थायी पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर सृजित किए जा सके। पर्यटन मंत्रालय अपनी विभिन्न योजनाओं जैसे ‘स्वदेश दर्शन (एसडी)’, ‘स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी 2.0)’, ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी)’ – स्वदेश दर्शन के तहत एक पहल और ‘तीर्थस्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद)’ आदि के तहत राज्य सरकारों को, उनसे परियोजना प्रस्तावों की प्राप्ति पर निधियों की उपलब्धता, कराई जाती है। पर्यटन मंत्रालय ने हिमालयी विषय सहित चिन्हित विषयगत परिपथों के तहत पहाड़ी तथा पर्वतीय क्षेत्रों सहित पर्यटन अवसंरचना के विकास के उद्देश्य से वर्ष 2014-15 में स्वदेश दर्शन योजना शुरू की थी और देश में 5295.24 करोड़ रुपये की 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी।
स्थायी और जिम्मेदार पर्यटन स्थलों के विकास के उद्देश्य से इस योजना को अब स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी 2.0) के नाम से नया रूप दिया गया है और मंत्रालय ने इस पहल के तहत देश में 2207.08 करोड़ रुपये की 53 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके अलावा, मंत्रालय ने ‘तीर्थस्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद)’ और ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी)’-स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत एक पहल के तहत 1726.74 करोड़ रुपये की 54 परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है और संस्कृति तथा विरासत, आध्यात्मिक पर्यटन, जीवंत ग्राम और पारिस्थितिकी पर्यटन तथा अमृत धरोहर स्थलों जैसी 4 श्रेणियों के तहत 687.99 करोड़ रुपये की 37 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सीबीडीडी पहल का प्राथमिक उद्देश्य पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने और पर्यटन स्थलों को स्थायी तथा जिम्मेदार स्थलों के रूप में परिवर्तित करने के लिए गंतव्यों का समग्र विकास करना है। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी)’ नामक उप-योजना ने सीमावर्ती गांवों में पर्यटन आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों के साथ साझे प्रयास और समग्र गंतव्य विकास के माध्यम से जीवंत ग्राम कार्यक्रम को अपनी विषयगत श्रेणियों में से एक के रूप में भी चिन्हित किया है।
पर्वतीय राज्यों विशेषकर उत्तराखंड की बात करें तो स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत टिहरी झील और निकटवर्ती क्षेत्रों का नए गंतव्य के रूप में विकास के लिए इको-पर्यटन, एडवेंचर स्पोर्ट्स और संबद्ध पर्यटन संबंधी अवसंरचना का एकीकृत विकास में 69.17 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसी तरह संस्कृति तथा विरासत, आध्यात्मिक पर्यटन, जीवंत ग्राम और पारिस्थितिकी पर्यटन तथा अमृत धरोहर स्थलों के विकास की योजना क्रम में कुमाऊं क्षेत्र में विरासत परिपथ कटारमल – जोगेश्वर – बैजनाथ – देवीधुरा का एकीकृत विकास 76.32 करोड़, टी गार्डन एक्सपीरियंस में 19.89 करोड़, गूंजी में पर्यावरण ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर एक्सपीरियंस 17.86 करोड़, उत्तरकाशी जादुंग का विकास 4.99 करोड़, कैंची धाम परिसर कैंची धाम का विकास 17.60 करोड़, माना गांव में हाट 4.89 करोड़, वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित पर्यटक केंद्रों का विकास’ के तहत ऋषिकेश में राफ्टिंग बेस स्टेशन में 100 करोड़ अवमुक्त किए गए हैं। तीर्थस्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद)’ और ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी)’-स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत केदारनाथ के एकीकृत विकास में 34.77 करोड़, बद्रीनाथ धाम में तीर्थयात्रा अवसंरचना के विकास में 56.15 करोड़, गंगोत्री यमुनोत्री में तीर्थयात्रा अवसंरचना सुविधा वृद्धि में 54.36 करोड़ शामिल हैं।




