कांग्रेस को रामलीला मैदान के धार्मिक महत्व की जानकारी, फिर भी जातीय राजनीति रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण : तरुण बंसल

आजादी से ही जातिवादी राजनीति करती आई है
कांग्रेस पार्टी
देहरादून। भाजपा ने गंभीर आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं को हल्द्वानी रामलीला मैदान के धार्मिक महत्व की जानकारी है, फिर भी राजनीति के लिए सनातन अपमान को जातिवादी रंग दे रही है। लंबे समय से वहां रामलीला मैदान के प्रबंधकीय कार्यों से जुड़े पार्टी के प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल ने बताया कि पूर्व में भी अनेकों बार 135 वर्ष पुरानी इस धार्मिक आयोजन स्थल की शुचिता खंडित करने की कोशिश हुईं है, तब भी जनआंदोलन से ऐसे प्रयासों को रोका गया था। इस बार भी कांग्रेस की रैली में वहां दूसरे धर्म के नारे लगे और गंदगी फैलाई गई, इसी पाप के आरोप से बचने के लिए उनके नेता झूठे जातिवादी आरोप लगा रहे हैं।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह हताश एवं निराश है और राज्य में अपना राजनैतिक भविष्य अंधेरे में देख रही है। यही वजह है कि मुद्दाविहीन कांग्रेसी अपने धार्मिक अपमान के गंभीर अपराध को छिपाने के लिए झूठे जातिवाद के आरोपों पर हंगामा कर रहे हैं।
उन्होंने पलटवार कर कहा कि हल्द्वानी के जिस पवित्र मैदान को कांग्रेस जातिवाद आधारित राजनैतिक मैदान बनाने का काम कर रही है, मैं उस ग्राउंड को बहुत अच्छी तरह जानता हूँ। वह 135 वर्ष पुराना बहुत पवित्र स्थान है। वहां 135 वर्ष से कुमायूं की सबसे पुरानी रामलीला हो रही है। वहां जहां पर यह सभा हुई है उसके पीछे एक हनुमान की मूर्ति भी है, जिसकी पूजा का विशेष महत्व है। इन 135 वर्ष से वहां रामलीला मैदान को लेकर कभी कोई जातिवाद की चर्चा सामने नहीं आई। आज तक वहां हर प्रकार के हर समाज के लोगों ने रामलीला के पात्रों को जीवंत किया है। कभी कोई दिक्कत नहीं आई, स्वयं यशपाल आर्य तो बतौर नेता प्रतिपक्ष वहां रामलीला में मुख्य अतिथि रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वहां रामलीला मैदान की प्रबंध समिति में उन्हें भी सेवा करने का 10 वर्षों तक का अनुभव रहा है। वह दावे के साथ कह सकते हैं कि, वहां ग्राउंड पर जाति के आधार पर कुछ नहीं होता। वह एक ग्राउंड है जो पवित्र है, सनातनी ग्राउंड है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी आजादी से ही जातिवादी राजनीति करती आई है। हमेशा वह प्रत्येक विषय को जातीय मुद्दे से जोड़ देती है। सच यह है कि यह धार्मिक भावनाओं के अपमान का विषय है जिस पर जातिवादी राजनीति उचित नहीं है।




