उत्तराखण्डदेहरादून
उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ- गीता खन्ना ने लिया संज्ञान , कहा – नाबालिग स्कूली बच्चों का दोपहिया वाहन चलाना सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा

कहा – ऐसे मामलों में अभिभावको की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही संबन्धित विद्यालय प्रबन्धन की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाये
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ- गीता खन्ना ने स्कूली बच्चों के विद्यालयी वर्दी में दोपहिया वाहन चलाने एवं बिना हेलमेट वाहन चलाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए चिंता जतायी है। डॉ- गीता खन्ना ने बताया कि वह खुद स्कूली बच्चों को विद्यालय की पार्किंग से दोपहिया वाहन निकालकर चलाते हुए देख चुकी हैं, जो पूर्णतया नियम विरूद्ध एवं बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। आयोग की तरफ से एआरटीओ को निर्देश जारी किये गये हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अभिभावको की जिम्मेदारी तय करने के साथ संबन्धित विद्यालय प्रबन्धन की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा की जिस विद्यालय का नाबालिग छात्र बिना हेलमेट अथवा नियमों का उल्लंघन करते हुए वाहन चलाते पाया जाये उसके खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्यवाही की जाये। डॉ गीता खन्ना ने कहा की बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकान नहीं किया जायेगा। उन्होंने एआरटीओ को विद्यालयों के आसपास अभियान चलाने के भी निर्देश दिये हैं।
बाल आयोग अध्यक्ष ने कहा कि नाबालिग बच्चों को दोपहिया या चौपहिया वाहन चलाने से रोकने की सबसे बडी जिम्मेदारी अभिभावकों की है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में वाहन का चलाना बच्चों के लिए ही खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे स्कूल आने जाने के लिए अपने नाबालिग बच्चों को वाहन देने से बचें और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
सड़क दुर्घटनाओं का खतरा
नाबालिगों में मानसिक परिपक्वता और ट्रैफिक की समझ की कमी होती है। वे अचानक आने वाली आपातकालीन स्थिति या भीड़भाड़ में गाड़ी को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। उनकी गलती से न केवल उनकी अपनी जान खतरे में पड़ती है, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों, पैदल यात्रियों और दूसरे चालकों की जान भी जोखिम में आ जाती है। दुर्घटना होने पर बच्चे गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं या उनकी जान जा सकती है, जिससे परिवार को आजीवन का दुःख मिलता है।
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ- गीता खन्ना ने स्कूली बच्चों के विद्यालयी वर्दी में दोपहिया वाहन चलाने एवं बिना हेलमेट वाहन चलाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए चिंता जतायी है। डॉ- गीता खन्ना ने बताया कि वह खुद स्कूली बच्चों को विद्यालय की पार्किंग से दोपहिया वाहन निकालकर चलाते हुए देख चुकी हैं, जो पूर्णतया नियम विरूद्ध एवं बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। आयोग की तरफ से एआरटीओ को निर्देश जारी किये गये हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अभिभावको की जिम्मेदारी तय करने के साथ संबन्धित विद्यालय प्रबन्धन की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा की जिस विद्यालय का नाबालिग छात्र बिना हेलमेट अथवा नियमों का उल्लंघन करते हुए वाहन चलाते पाया जाये उसके खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्यवाही की जाये। डॉ गीता खन्ना ने कहा की बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकान नहीं किया जायेगा। उन्होंने एआरटीओ को विद्यालयों के आसपास अभियान चलाने के भी निर्देश दिये हैं।
बाल आयोग अध्यक्ष ने कहा कि नाबालिग बच्चों को दोपहिया या चौपहिया वाहन चलाने से रोकने की सबसे बडी जिम्मेदारी अभिभावकों की है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में वाहन का चलाना बच्चों के लिए ही खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे स्कूल आने जाने के लिए अपने नाबालिग बच्चों को वाहन देने से बचें और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
सड़क दुर्घटनाओं का खतरा
नाबालिगों में मानसिक परिपक्वता और ट्रैफिक की समझ की कमी होती है। वे अचानक आने वाली आपातकालीन स्थिति या भीड़भाड़ में गाड़ी को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। उनकी गलती से न केवल उनकी अपनी जान खतरे में पड़ती है, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों, पैदल यात्रियों और दूसरे चालकों की जान भी जोखिम में आ जाती है। दुर्घटना होने पर बच्चे गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं या उनकी जान जा सकती है, जिससे परिवार को आजीवन का दुःख मिलता है।




