हमेशा रहेंगे याद : देहरादून शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी के जनाजे की नमाज में भारी जन सैलाब उमड़ा, लोगों ने नम आंखों से किया सुपुर्द-ए-खाक

बीते रोज दिल का दौरा पड़ने से हुआ था इंतकाल
देहरादून। शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी को अंतिम विदाई देने के लिए भारी जन सैलाब उमड़ पड़ा । उनके जनाजे की नमाज में हजारों लोग शामिल हुए।
बीते रोज उनका दिल का दौरा पड़ने से इंतकाल हो गया था। जिन्हें रविवार को नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
वहीं, काजी अहमद कासमी के इंतकाल पर मुस्लिम समुदाय और परिचितों के साथ सामाजिक व राजनीतिक संगठनों में शोक की लहर है। जानकारी के मुताबिक मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी साल 1981 से देहरादून के शहर काजी थे, जिनका 75 साल की उम्र में इंतकाल हो गया। बीते रोज 22 नवंबर को मोहम्मद अहमद कासमी एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए नजीबाबाद जा रहे थे, तभी अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका इंतकाल हो गया। वहीं, रविवार 23 नवंबर को उनकी अंतिम यात्रा में उनके घर से चंदर नगर स्थित कब्रिस्तान तक लोगों का हुजूम उमड़ा। जहां नम आंखों से उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
सूर्यकांत धस्माना बोले- देहरादून ने खोई एक अमन पसंद धार्मिक शख्सियत
काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी की अंतिम यात्रा में शामिल हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि वो बीते 45 सालों से देहरादून के शहर काजी के पद पर रहे। साथ ही देहरादून की जामा मस्जिद के पेश इमाम के रूप में अपनी सेवाएं दी। शहर काजी को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा कि वो एक बेहतरीन खुश मिजाज व अमन पसंद धार्मिक नेता थे। हमेशा शहर में अमन चैन और आपसी धार्मिक सौहार्द के पक्षधर रहे। सभी धर्मों के लोगों का उनके प्रति आदर का भाव रहा।
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी के इंतकाल से देहरादून ने एक अमन पसंद धार्मिक नेता को खो दिया है। उन्होंने इसी साल होली के दिन 14 मार्च को मस्जिदों में जुमे की नमाज का समय बदलकर ढाई बजे कर दिया था। यह फैसला उन्होंने प्रशासन और पुलिस की अपील के बाद लिया था। जिसे काफी सराहा गया था। उधर, काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी के इंतकाल के बाद तमाम सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों में शोक की लहर है।





