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प्रधानमंत्री मोदी कल करेंगे उत्तराखंड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई परीक्षण,राज्य सरकार को केंद्र से बड़े पैकेज की उम्मीद

पीएम गुरुवार को शाम 4.15 बजे करेंगे हवाई सर्वेक्षण,
शाम पांच बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर राज्य के अधिकारियों के साथ करेंगे  उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक , राहत और पुनर्निर्माण कार्यों की रणनीति पर होगी चर्चा
देहरादून। उत्तराखंड इस मानसून में प्रकृति के भीषण प्रकोप से जूझ रहा है, जहां पर्वतीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई है। इसी त्रासदी का जायजा लेने और राज्य को आर्थिक संबल प्रदान करने की उम्मीद के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। राज्य सरकार को इस दौरे से केंद्र से बड़े आर्थिक पैकेज की आस है, ताकि व्यापक क्षति की भरपाई की जा सके।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद देहरादून पहुंचेंगे। वे शाम करीब 4.15 बजे अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। इसके बाद शाम पांच बजे, जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर ही वे राज्य के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें राहत और पुनर्निर्माण कार्यों की रणनीति पर चर्चा होगी।
बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचकर प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री धामी ने इस दौरे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है और आपदा के इस कठिन समय में उनका निरंतर सहयोग व मार्गदर्शन मिलता रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री के आगमन से आपदा राहत कार्यों को और गति मिलेगी।
5644 करोड़ का नुकसान का अनुमान
देहरादून। इस वर्ष अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण उत्तराखंड को भारी नुकसान हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में 85 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 94 लोग अब तक लापता हैं। विभिन्न घटनाओं में 128 लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के आकलन के मुताबिक, राज्य को अब तक 1944 करोड़ रुपये की लागत की सड़कें, स्कूल, बिजली लाइनें, सब-स्टेशन और सिंचाई नहरें जैसी महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां बर्बाद हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, खतरे की जद में आई संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए करीब 3700 करोड़ रुपये की आवश्यकता का अनुमान है। राज्य को उम्मीद है कि पंजाब और हिमाचल के अनुपात में केंद्र सरकार उत्तराखंड को भी राहत, बचाव और पुनर्निर्माण-पुनर्वास के लिए बड़ा आर्थिक पैकेज देगी।
भारत सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम ने किया उत्तराखण्ड विभिन्न क्षेत्रों का दौरा
देहरादून। प्रधानमंत्री के दौरे से पूर्व भारत सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम ने भी मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात की। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में आई इस टीम ने उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, बागेश्वर और नैनीताल जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया था। टीम ने आपदा प्रभावितों से बातचीत के बाद राज्य सरकार द्वारा संचालित राहत कार्यों को सराहनीय बताया। मुख्यमंत्री धामी ने टीम को बताया कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है और उन्होंने भूस्खलन के नुकसान को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करने तथा बादल फटने व भूस्खलन से स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हुई भूमि के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के इस दौरे से न केवल आपदाग्रस्त क्षेत्रों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत रणनीति भी तैयार हो सकेगी।

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