उत्तराखण्डदेहरादून

उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग    अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने की   निजी विद्यालयों से संबंधित मामलों की सुनवाई , अपनाया सख्त रुख

आयोग ने बाल अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर संज्ञान लेते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए
देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग  की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोग में विभिन्न निजी विद्यालयों से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान आयोग द्वारा बाल अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर संज्ञान लेते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
ब्राइट लैंड्स विद्यालय के एक छात्र का प्रकरण आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसमें छात्र की जबरन टी.सी. (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) निर्गत की गई थी। साथ ही शुल्क वापसी के संबंध में विद्यालय द्वारा आयोग के पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया था। आयोग की अग्रिम कार्यवाही के क्रम में छात्र की शुल्क वापसी कराई गई तथा विद्यालय प्रबंधन ने आयोग को लिखित माफीनामा भी प्रेषित किया ।
कैम्ब्रियन हॉल विद्यालय से संबंधित जमीनी विवाद एवं विभिन्न पक्षों की शिकायतों पर सुनवाई की गई। आयोग ने पारदर्शी प्रक्रिया में पाया कि वर्तमान में विद्यालय बिना वैध लीज़ के संचालित है तथा संबंधित सोसायटी का पंजीकरण अभी लंबित है। दोनों पक्षों द्वारा ट्रस्ट की शेष भूमि की खरीद-फरोख्त से जुड़े तथ्य प्रस्तुत किए गए, जिस पर आयोग ने इसे अपनी कार्य-सीमा से बाहर बताते हुए सुनने से इंकार किया।
सोसायटी के रजिस्ट्रार को पत्र एवं दूरभाष के माध्यम से निर्देशित किया गया कि वे एनओसी
की प्रक्रिया, सोसायटी से जुड़े निर्देशों तथा अपना वक्तव्य प्रस्तुत करें। क्योंकि नो-मैन्स-लैंड पर विद्यालय संचालन की एनओसी निर्गत नहीं की जा सकती। विद्यालय को अपने सभी दस्तावेज प्रस्तुत कर उन्हें सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। साथ ही शिक्षा विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा गया कि भूमि की वैधता एवं सोसायटी पंजीकरण के बिना तथा भूमि अभिलेखों की जांच किए बिना एनओसी कैसे निर्गत की गई।
कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी विद्यालय में एक बालिका के साथ अपमानजनक व्यवहार एवं उसकी अस्मिता पर व्यक्तिगत आघात का मामला सामने आया। इस प्रकरण में प्रधानाचार्य सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं। बीईओ के कार्यालय से आए अधिकारियों को 17 जनवरी को अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। चूंकि बालिका की कक्षा 12 की परीक्षा है, इसलिए उसकी पढ़ाई में व्यवधान न हो, इसके लिए उसे वीडियो कॉलिंग के माध्यम से सुनवाई से जोड़ने का निर्देश दिया गया।
लूसेंट विद्यालय का मामला, जिसमें पूर्व वर्षों में बिना पंजीकरण के छात्रों को धोखे से रखा गया था, पर भी सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय की सहायता से कुछ छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति दिलाई गई थी । इसके बावजूद  शिक्षा विभाग द्वारा बार बार पूछे जाने पर भी विधालय से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ, न ही प्रबंधन समिति उपस्थित हुई।
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने एनओसी को समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं, तथा इसी संबंध में बीईओ को आयोग द्वारा निर्देशित किया कि विधालय के बाहर बोर्ड लगाया जाये जिससे अभिवावकों  को पता चल सके ।
मदरसा जामिया इस्ताफ़तिमातुज़्ज़हारा की सुनवाई के क्रम में मंगलवार को वहाँ की प्रबंधन समिति एवं अध्यापकगण सभी संबंधित अभिलेखों सहित सुनवाई में उपस्थित हुए। प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों के संतोषजनक पाए जाने पर उनके प्रकरण को निस्तारित कर दिया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button