बाल अधिकारों पर हैंडबुक निर्माण विषय पर दो दिवसीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन – कई राज्यों एवं राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों ने की शिरकत

उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना के नेतृत्व में किया गया मंथन
देहरादून।उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना के नेतृत्व में डॉ. आर. एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल में “बाल अधिकारों पर हैंडबुक निर्माण (एक बच्चों के लिए एवं एक हितधारकों के लिए)” विषय पर दो दिवसीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया । एलबार फॉर उत्तराखंड एसपीसीआर ने डॉ गीता खन्ना की अध्यक्षता में देश में प्रथम बार यह भगीरथी प्रयास किया गया ।
सम्मेलन का उद्देश्य बाल अधिकारों से संबंधित दो व्यवहारिक एवं उपयोगी हैंडबुक तैयार किया जा सके , एक बच्चों के लिए सरल एवं बाल-अनुकूल प्रारूप में तथा दूसरा विभिन्न हितधारकों के लिए, जिससे बाल संरक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं समन्वित बनाया जा सके।
आयोग की अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने सम्मेलन के उद्देश्य, रूपरेखा एवं अपेक्षित परिणामों पर प्रकाश डालते हुए हैंडबुक के कार्य को शीघ्रातिशीघ्र करने पर जोर दिया जिससे कि बच्चों व उनके हितधारकों को उनके अधिकारों एवं उनसे संबंधित नियमों की जानकारी दी जा सके। राष्ट्रीय स्तर पर ये अपने आप में ऐसा प्रथम प्रयास है ।
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों एवं राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों की सहभागिता रही। इसमें सर्वप्रथम विभिन्न आयोगों के अध्यक्षों में डॉ. श्यामल प्रसाद सैकिया, अध्यक्ष, असम राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग; श्रीमती जयन्ती देबबर्मा, अध्यक्षा, त्रिपुरा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग; तथा मुकेश कुमार, अध्यक्ष, अनुसूचित जाति आयोग शामिल रहे। संजीव शर्मा, सदस्य सचिव, आयोग ने आभासी रूप से प्रतिभाग करते हुए हैंडबुक तैयार किए जाने के लिए संपूर्ण सहयोग किए जाने के लिए कहा गया। उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे प्रयास के बारे में सोचना ही बड़ी बात है और इस पर एक और चर्चा दिल्ली में आने वाले माह में की जाएगी। इस कार्यशाला के आयोजन में सचिव एसके बरनवाल ,अनु सचिव एसके सिंह , ममता रौथाण, विधि अधिकारी; एवं डॉ. निशात इकबाल, बाल मनोवैज्ञानिक की सक्रिय भूमिका रही।
सम्मेलन में विभिन्न सत्र हुए आयोजित
सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में बाल संरक्षण तंत्र, बाल-अनुकूल न्याय प्रणाली, साइबर सुरक्षा, मानव तस्करी, नशा मुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य, विद्यालयों में बाल अधिकार तथा सार्वजनिक स्थानों एवं परिवहन में बाल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया एमडीआर गीता खन्ना की अध्यक्षता में समूह चर्चा के माध्यम से दोनों प्रस्तावित हैंडबुक की संरचना, प्रमुख अध्यायों एवं विषयवस्तु को अंतिम रूप देने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए। इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया गया कि तैयार की जाने वाली हैंडबुक व्यवहारिक, समावेशी एवं बाल-अनुकूल हों।
समापन सत्र में सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्ष एवं सिफारिशें प्रस्तुत की गईं तथा सभी प्रतिभागियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। यह पहल बाल अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।





