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भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा – एथेनॉल को चीनी की महंगाई से जोड़ना कांग्रेस का प्रोपेगेंडा

नारेबाजी के बजाय तथ्यों के साथ बात करे कांग्रेस,
एथेनॉल के लिए चीनी की हिस्सेदारी 12 से घटकर 9 फीसदी ,फिर भी कांग्रेस फैला रही भ्रम,
मक्का से बढ़ा एथेनॉल उत्पादन, अनाज की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री मनवीर सिंह चौहान ने चीनी की कीमतों को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस एक बार फिर तथ्यों से परे जाकर जनता को गुमराह करने और राजनीतिक भ्रम फैलाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि हाल में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्ट किए जाने से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत है। इसके बावजूद कांग्रेस एथेनॉल के नाम पर प्रदर्शन कर रही है, जो उसकी झूठ की राजनीति को स्पष्ट करती है।
चौहान ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में करीब 9 प्रतिशत रह गई है। इतना ही नहीं, देश में अब करीब तीन-चौथाई एथेनॉल उत्पादन अनाज, विशेषकर मक्का, से हो रहा है। ऐसे में कांग्रेस का यह दावा कि एथेनॉल नीति के कारण चीनी महंगी हुई है, तथ्यों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम रहना, त्योहारी सीजन से पहले मांग में वृद्धि, गन्ने की फसल पर मौसम और बीमारियों का असर, वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी तथा कुछ क्षेत्रों में जमाखोरी इसके प्रमुख कारण हैं। सरकारी आंकड़ों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमत 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि यदि एथेनॉल नीति ही चीनी संकट का कारण है, तो 2025-26 सीजन के 20 अगस्त तक 97 प्रतिशत गन्ना बकाये का भुगतान किसानों को कैसे हो गया? केंद्र के अनुसार अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल की ओर डायवर्ट करने से चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई और किसानों के भुगतान में भी मदद मिली। इससे यह स्पष्ट होता है कि एथेनॉल कार्यक्रम ने चीनी उद्योग की पुरानी अधिशेष उत्पादन की समस्या को दूर करने में सकारात्मक भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को नारेबाजी के बजाय यह भी देखना चाहिए कि केंद्र सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की है। 1 सितंबर से थोक उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। मिलों में स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है तथा घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी गई है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को हर महंगाई के मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेंकने की बजाय जनता को सही तथ्य बताने चाहिए। एथेनॉल नीति ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ चीनी उद्योग को अधिशेष उत्पादन की समस्या से राहत दी है। दूसरी ओर, कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर भी भ्रम फैला रही है और अब चीनी की कीमतों के लिए भी उसी को जिम्मेदार ठहरा रही है।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस का प्रदर्शन जनता के हित में नहीं, बल्कि जनता को भ्रमित करने के लिए है। केंद्र सरकार ने कीमतों पर निगरानी, स्टॉक सीमा, आयात और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई जैसे ठोस कदम उठाए हैं। कांग्रेस को भी प्रदर्शन की राजनीति छोड़कर तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। देश की जनता अब नारे और झूठे आरोप नहीं, बल्कि परिणाम और तथ्य देखती है। उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस की निम्न स्तरीय क्रियाकलापों को देख रही है और उसे मुँह तोड़ जवाब देगी।

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