प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की नाराजगी भरी चिट्ठी बेअसर, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फिर निकाली यात्रा, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चल रहे साथ

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस नेताओं की आपस में ही जबरदस्त राजनीति चल रही है। इससे पार्टी के नेता अचंभित हैं तो कार्यकर्ता असमंजस में. किसी को समझ नहीं आ रहा है कि ये चल क्या रहा है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा हरीश रावत को उनकी यात्रा रोकने को कह रही हैं, तो पूर्व सीएम ने इसके बावजूद पूरे दिन का ही कार्यक्रम सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।
हरीश रावत लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में जनता और कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं। पार्टी प्रभारी की आपत्ति के बाद भी यात्रा जारी रहने से यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर प्रदेश कांग्रेस में फैसलों और कार्यक्रमों को लेकर अंतिम समन्वय की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
हालांकि, रावत का कहना है कि उनकी यात्रा पार्टी के खिलाफ नहीं है। वह खुद को कांग्रेस का सिपाही बताते हुए पार्टी को मजबूत करने की बात कर रहे हैं। ऐसे में पूरे विवाद का केंद्र रावत की राजनीतिक मंशा से अधिक संगठन के साथ कार्यक्रमों के समन्वय का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने रावत को पत्र लिखकर यात्रा और समानांतर कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने की सलाह दी थी। इसके बावजूद सोमवार को रावत ने जसपुर से कुमाऊं में यात्रा शुरू कर दी।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दिल्ली तलब किया है। बताया जा रहा है कि 7 अक्टूबर को हरीश रावत पार्टी आलाकमान से मुलाकात करने को दिल्ली जा सकते हैं।
उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने एक अक्तूबर को हरीश रावत को पत्र भेज का कहा था, कि प्रदेश कांग्रेस के समानांतर कोई कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं होगा। उन्होंने रावत से ऐसे कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने को कहा था। इसके बावजूद सोमवार से रावत ने जसपुर से यात्रा शुरू कर दी है, उनके साथ चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, कई विधायक और पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल भी यात्रा में शामिल हैं।बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जन संवाद यात्रा’ कांग्रेस के भीतर गहरी खींचतान का मुद्दा बन गई है। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के स्पष्ट आपत्ति-पत्र के बावजूद भी हरीश रावत ने यात्रा जारी रखी, जिससे सवाल उठ रहा है कि ये बगावत है, संगठन में दबदबा बनाने का प्रयास है, या चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की रणनीति है?





