उत्तराखण्डनैनीताल

Big Breaking – गिरधारी लाल साहू को हाई कोर्ट से बड़ा झटका- कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की कराई गई एफआईआर रद्द करने से इनकार

कैबिनेट मंत्री ने अपनी शिकायत में लगाए हैं कई गंभीर आरोप
नैनीताल। हाईकोर्ट ने गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी द्वारा दायर की गई उस रिट याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें थाना केदार/कैंट जिला देहरादून में कैबिनेट मंत्री व उनकी पत्नी रेखा आर्य की और से दर्ज कराई गई
एफआईआर  को रद्द करने की मांग की गई थी। इस मामले में रेखा आर्य ने गिरधारी साहू पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धारा 3;1द्ध करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। याची के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि दोनों पक्षों की शादी 6 जुलाई 2004 को हुई थी और लगभग 22 वर्षों से वे साथ रह रहे हैं, इसलिए यह केवल घरेलू विवाद का मामला है, जिसे अब आपराधिक रंग दिया जा रहा है।
रेखा आर्य ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि शादी के वक्त उनकी पहली शादी और बच्चों की बात छिपाई गई थी और बाद में अन्य महिलाओं से अवैध संबंध रखने तथा विरोध करने पर उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज व जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने फर्जी हस्ताक्षर कर और दस्तावेज तैयार कर उन्हें कंपनी के निदेशक पद से जबरन सेवानिवृत दिखा दियाया ,जबकि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया था। साथ ही एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र है ,जिसमें कथित तौर पर साहू द्वारा उन्हें रास्ते से हटाने ;कत्ल करने की साजिश रचने और इसके लिए पैसे खर्च करने की बात सामने आई थी। राज्य सरकार के सरकारी वकील और रेखा आर्य के वकील ने इन गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए याचिका का कड़ा विरोध किया और कहा कि याची जांच में सहयोग भी नहीं कर रहा है।न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद स्पष्ट किया कि इस मामले के आरोप केवल सामान्य वैवाहिक मनमुटाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूट रचना तथा जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया शामिल हैं। अदालत ने कहा कि 22 साल का पुराना रिश्ता होने मात्र से बाद में होने वाले अपराधों या क्रूरता की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता और ऑडियो रिकॉर्डिंग व फर्जी दस्तावेजों की सत्यता जांच तथा विचारण का विषय है। सुप्रीम कोर्ट के भजलाल और निहारिका इन्फ्रास्ट्रक्चर मामलों के सिद्धांतों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर अदालत मिनी ट्रायल नहीं कर सकती, अतः एफआईआर को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता और यह रिट याचिका खारिज की जाती है।

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