आरएसएस चीफ के उत्तराखंड दौरे का दूसरा दिन – संवाद कार्यक्रम में डॉ मोहन भागवत ने कहा ,राष्ट्र के भाग्य निर्माण में होती है समाज की केंद्रीय भूमिका , “समाज मजबूत होगा तो, राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी

पूर्व सैनिकों एवं पूर्व सेना अधिकारियों के साथ “प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद कार्यक्रम” आयोजित
देहरादून।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत के उत्तराखंड प्रवास के द्वितीय दिवस पर सोमवार को देहरादून के निम्बूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट में पूर्व सैनिकों एवं पूर्व सेना अधिकारियों के साथ “प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद कार्यक्रम” सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के आरंभ में पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल एवं कर्नल मयंक चौबे ने सरसंघचालक भागवत का शाल ओढ़ाकर एवं पारंपरिक टोपी से स्वागत एवं अभिनंदन किया। इसके साथ ही सेना का नेतृत्व कर चुके सेवानिवृत 6 जनरल, वाईस एडमिरल, डीजी कॉस्ट गार्ड, ब्रिगेडयर एवं 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारियो ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही कप्तान एवं हवलदार के रैंक अपनी सेवा दे चुके पूर्व सैनिक सैकड़ो की संख्या में जोश के साथ अपने सैन्य परिधानों में कार्यक्रम में शामिल रहे। कार्यक्रम में मंच का संचालन राजेश सेठी ने किया।
अपने उद्बोधन में डॉ भागवत ने कहा कि राष्ट्र के भाग्य निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका होती है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि “समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी।” समाज का संगठित सामर्थ्य ही प्रत्येक नागरिक को बलशाली बनाता है, इसीलिए समाज के नेतृत्व का चरित्रवान एवं अनुशासित होना अनिवार्य है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर क्रांतिकारी आंदोलनों तक की परंपरा का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि स्वाधीनता की ज्योति कभी बुझी नहीं। द्वितीय विश्वयुद्ध के संदर्भ में विंस्टन चर्चिल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास से सीख लेना ही परिपक्व राष्ट्रीय चेतना का लक्षण है।
संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की स्मृति में उन्होंने कहा कि वे जन्मजात राष्ट्रभक्त थे, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में निर्भीक भूमिका निभाई। उनके संपर्क में मदन मोहन मालवीय सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानी रहे। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का एकमात्र उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, चुनावी राजनीति नहीं क्योंकि जब व्यक्ति सुदृढ़ होता है तभी राष्ट्र सुदृढ़ होता है। संघ बिना किसी बाह्य साधन के खड़ा हुआ और दो बार प्रतिबंध झेलने के बाद भी समाज की आत्मशक्ति के बल पर आगे बढ़ता रहा।
जिज्ञासा संवाद सत्र में कार्यक्रम के द्वितीय एवं विशेष सत्र में उपस्थित पूर्व सैनिकों एवं अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता, युवा पीढ़ी एवं नीतिगत विषयों पर अनेक महत्त्वपूर्ण प्रश्न रखे, जिनका डॉ भागवत ने अत्यंत तार्किक एवं संतुलित भाव से उत्तर दिया।कार्यक्रम का समापन इन प्रेरक शब्दों के साथ हुआ “संघ का उद्देश्य कभी प्रचार नहीं रहा” समाज का संगठन और राष्ट्र का उत्थान ही उसकी एकमात्र प्रेरणा है। संघ नहीं, समाज के कारण देश बड़ा हुआ ,यह इतिहास में दर्ज होना चाहिए। राष्ट्र गान के ओजस्वी गायन के साथ कार्यक्रम का भावपूर्ण समापन हुआ।





