मैक्स हॉस्पिटल देहरादून के विशेषज्ञों ने किया जागरूक: डॉ शमशेर बोले – स्ट्रोक के लक्षण होने पर इलाज में ना करें देरी

मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून ने वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर बढ़ाई अवेयरनेस
देहरादून: वर्ल्ड स्ट्रोक डे के मौके पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून, ने जागरूकता बढ़ाई और स्ट्रोक से लड़ने में रोकथाम और समय पर इलाज के महत्वपूर्ण कदम पर ज़ोर दिया – जो दुनिया भर में मौत और लंबे समय तक विकलांगता के मुख्य कारणों में से एक है। इस साल की थीम, “रोकथाम की शक्ति: अपने दिमाग की रक्षा करें,” इस बात पर ज़ोर देती है कि कैसे छोटे, लगातार लाइफस्टाइल में बदलाव स्ट्रोक के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं।
बुधवार को वर्ल्ड स्ट्रोक डे के मौके पर आयोजित प्रेस वार्ता में मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून के न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. शमशेर द्विवेदी ने कहा कि “स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है जो किसी को भी, कभी भी हो सकती है और तब होती है ,जब दिमाग में खून का बहाव रुक जाता है, जिससे उसे ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते। कुछ ही मिनटों में दिमाग की कोशिकाएं मरने लगती हैं, जिससे लकवा, बोलने में दिक्कत और याददाश्त की समस्या हो सकती है। स्ट्रोक के खिलाफ रोकथाम और जल्दी पहचान सबसे असरदार हथियार हैं। डॉ शमशेर ने कहा कि चेतावनी के संकेतों को पहचानना जैसे बैलेंस बिगड़ना, आंखों में बदलाव, चेहरा लटकना, बांह में कमज़ोरी, बोलने में दिक्कत, और फौरन एक्शन लेना हम बी फास्ट हो सकते हैं। तुरंत एक्शन और फौरन मेडिकल केयर न सिर्फ जान बचा सकती है, बल्कि दिमाग के ज़रूरी काम को भी बचा सकती है।”उन्होंनेे कहा कि स्ट्रोक के लक्षण होनेेेे पर इलाज लेने में देरी न करें। डॉ शमशेर ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को
स्ट्रोक आता है तो उसे कम से कम 30 से 60 मिनट में ऐसे अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचना चाहिए जहां न्यूरोलॉजिस्ट और एमआरआई की सुविधा मौजूद हो। शुरू के 30 मिनट इलाज के लिए सबसे अच्छा समय होता है।
सही समय पर डॉक्टर के पास पहुंचने से स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है।
लाइफस्टाइल में बदलाव स्ट्रोक के खिलाफ सबसे मजबूत बचाव : डॉ नितिन गर्ग
इस मौके पर मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून के न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट – डॉ. नितिन गर्ग ने ज़ोर दिया कि “लाइफस्टाइल में बदलाव स्ट्रोक के खिलाफ सबसे मजबूत बचाव है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी स्थितियों को कंट्रोल में रखने से जोखिम काफी कम हो सकता है। लगभग 90 फीसदी स्ट्रोक को स्वस्थ आदतों और हाइपरटेंशन, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता जैसे जोखिम कारकों को कंट्रोल करके रोका जा सकता है। जागरूकता और प्रोएक्टिव हेल्थ चेक-अप रोकथाम की दिशा में पहला कदम हैं।”





