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आर्थिक मुद्दे पर भाजपा का कांग्रेस को करारा जवाब – जानकारी दुरूस्त करे कांग्रेस, उत्तराखंड कर रहा बेहतर ऋण प्रबंधन : मनवीर चौहान

कहा-केंद्र से लिया गया है 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण,
-अवस्थापना विकास पर अब हो रहे 11 हजार करोड़ खर्च,
-राज्य में राजस्व सरप्लस की स्थिति, व्यय से आय ज्यादा,
– कांग्रेस सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का ख़ामियाज़ा भुगत रही धामी सरकार ,
वर्ष 2013 की आपदा के बाद लिए गए ऋण के भुगतान का दायित्व भी  उठा रही धामी सरकार,
– काँग्रेस सरकार के लिए छह हजार करोड़ से अधिक का ऋण  धामी सरकार ने चुकाया
देहरादून। ऋण को आधार बनाकर धामी सरकार को घेरने चली कांग्रेस को भाजपा ने करारा जवाब दिया है। भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस पहले अपनी जानकारी दुरूस्त करे। धामी सरकार ने राज्य की बेहतरी के लिए भारत सरकार से जो ऋण लिया है, वह ब्याजमुक्त है, जिसे 50 वर्ष बाद लौटाया जाना है। भाजपा  ने यह भी कहा है कि कांग्रेस ये ना भूले कि उत्तराखंड बेहतर ऋण प्रबंधन करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने आर्थिक मसले पर धामी सरकार की उपलब्धियों को बिंदुवार सामने रखा है। चौहान के अनुसार-धामी सरकार ने अपनी नीतियों से राजस्व अधिशेष यानी रेवन्यू सरप्लस की स्थिति बनाई है। इसका सीधा सा अर्थ है कि उत्तराखंड के राजस्व व्यय से अधिक उसकी राजस्व आय है। वित्तीय अनुशासन के लिए राज्य सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। नीति आयोग, अरूण जेटली नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट जैसी संस्थाओं ने राज्य सरकार को सराहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एफआरबीएम एक्ट के अंतर्गत ही ऋण लेने की नीति बनाई है। ऋण-जीएसडीपी अनुपात को सुरक्षित दायरे में रखा गया है। राजकोषीय घााटा तीन प्रतिशत के भीतर ही रखा गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धामी सरकार ने महंगा कर्ज बढ़ाने की बजाय राज्यों के लिए विशेष पूंजीगत सहायता एसएएससीआई जैसी योजना का लाभ लेने की कोशिश की है। इसके अंतर्गत पूंजीगत विकास के लिए राज्यों को शून्य ब्याज पर 50 वर्ष के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। तकनीकी आधार पर ऋण के रूप में दिखते हुए भी इस आर्थिक सहायता का वास्तविक भार राज्य सरकार पर नहीं पड़ता।
चौहान के अनुसार-पिछले तीन वर्षों में प्रतिवर्ष लगभग 2000 करोड़ का इस योजना से राज्य को लाभ हुआ है। इस वर्ष भी 2300 करोड़ से अधिक का इस योजना से लाभ लिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले पूंजीगत विकास कार्यो में प्रतिवर्ष पांच से छह हजार करोड़ रूपये व्यय होता था। अब अवस्थापना विकास कार्यों में लगभग 11 हजार करोड़ रूपये व्यय होता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद लिए गए ऋण के भुगतान का दायित्व भी धामी सरकार उठा रही है। इस क्रम में गत वर्ष छह हजार करोड़ से अधिक का ऋण चुकाया गया है।
चौहान ने कहा की धामी सरकार ने हाल के वर्षों में उधारी पर अनुशासन रखते हुए राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक ऋण दोनों को तय सीमा के भीतर रखा है । और यह उपलब्ध आंकड़े दिखा रहे हैं कि राजस्व अधिशेष, सीमित कर्ज वृद्धि और राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड को मिली सराहना धामी सरकार की अच्छे वित्तीय प्रबंधन की स्पष्ट तस्वीर को दर्शाती है ।

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