सीरत-उन-नबी समिति ने मानवता के संदेश पर आयोजित किया ख़ास प्रोग्राम- मुफ्ती सलीम अहमद क़ासमी ने कहा – पैगंबर साहब का पवित्र जीवन पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन और रहमत का स्रोत

युवा पीढ़ी मोहम्मद साहब के आदर्शों व श्रेष्ठ चरित्र को अपने जीवन में अपनाएँः अजमल
देहरादून। सीरत-उन-नबी समिति देहरादून के तत्वावधान में टर्नर रोड देहरादून स्थित तस्मिया ऑडिटोरियम में ‘पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.) का मानवता के लिए संदेश’ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक विद्वानों, सामाजिक हस्तियों और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.) की सीरत-ए-पाक की रोशनी में उनके सार्वभौमिक प्रेम, शांति, भाईचारे, न्याय, समानता और सहिष्णुता के संदेश को उजागर करना था।
मुहम्मद अली की पवित्र कुरआन की तिलावत और फ़रुख़ अहमद उर्फ़ शहज़ादे की नात-ए-रसूल (स.अ.) से कार्यक्रम का आगाज़ हुआ। मुफ्ती सलीम अहमद क़ासमी ने कहा कि पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.) का पवित्र जीवन पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन और रहमत का स्रोत है। उन्होंने कहा कि पैगंबर (स.अ.) ने मानवता को आपसी प्रेम, भाईचारे, सदाचार, न्याय, निष्पक्षता और मानव सेवा की शिक्षा दी।
मुफ्ती वसीउल्लाह ने ‘पैगंबर (स.अ.) की शिक्षाएँ’ विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें पैगंबर (स.अ.) की शिक्षाओं और उनके आदर्श जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया गया।
मुख्य अतिथि मौलाना अब्दुर्रहमान अजमल ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपील की कि वे पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.) की सीरत का अध्ययन करें और उनके उच्च आदर्शों एवं श्रेष्ठ चरित्र को अपने जीवन में अपनाएँ।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सैयद फ़ारूक़ ने कहा कि आज के समय में जब समाज विभिन्न चुनौतियों, मतभेदों और संघर्षों का सामना कर रहा है, ऐसे में पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.) की सीरत के सार्वभौमिक संदेश को फैलाने की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि हम पैगंबर (स.अ.) की शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन का हिस्सा बना लें तो समाज में शांति, सहिष्णुता और आपसी सम्मान को मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन सैयद मुहम्मद यासिर ने
किया।
मौलाना रिसालुद्दीन हक़्क़ानी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया व हाफ़िज़ गुलज़ार, इमाम मस्जिद आयशा ने देश, मुस्लिम उम्मत और पूरी मानवता की शांति एवं सुरक्षा के लिए दुआ कराई।




