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कृषि मंत्री  जोशी ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में जीईओ लाइन टैंकों की गुणवत्ता पर जताई गंभीर चिंता , जांच के दिए निर्देश

कृषि मंत्री जोशी ने की विभागीय समीक्षा, 
ग्रामीण क्षेत्रों में लौटे प्रवासियों के लिए स्वरोजगार कार्ययोजना बनाने पर जोर
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने तीन दिवसीय जनपद भ्रमण (चमोली, पौड़ी गढ़वाल) से लौटने के फौरन बाद शनिवार को देहरादून स्थित कैंप कार्यालय में कृषि विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों की प्रगति, योजनाओं के क्रियान्वयन और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के दौरान कृषि मंत्री  जोशी ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत विभिन्न जनपदों में निर्मित हो रहे जीईओ लाइन टैंकों की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देशित किया कि जहाँ-जहाँ गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई है, वहां संबंधित निजी कंपनी की कार्यप्रणाली की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। जोशी ने स्पष्ट कहा कि योजनाओं में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने समीक्षा के दौरान कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लौटे प्रवासियों को कृषि और बागवानी आधारित आजीविका साधनों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस दिशा में शीघ्र एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वावलंबी बन सकें। मंत्री जोशी ने जनपद ऊधम सिंह नगर में उर्वरक (फर्टिलाइजर) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है।
कृषि मंत्री ने जैविक खेती को बढ़ावा देने, घेरबाड़,  प्रदेश में आपदा से प्रभावित कृषि क्षेत्र का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार करने तथा प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना की दूसरी किस्त रिलीज़ कराने के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र भारत सरकार को भेजने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड स्तर पर निगरानी मजबूत करने, लंबित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने तथा योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचाने पर विशेष जोर देने को कहा। इस अवसर पर निदेशक कृषि परमाराम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
6727 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण 
बैठक के दौरान विभागीय मंत्री जोशी ने प्राकृतिक खेती की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने अवगत कराया कि वर्ष 2022 से अब तक प्रदेश, जनपद एवं ग्राम स्तर पर आयोजित 29 प्रशिक्षण कार्यक्रम व कार्यशालाओं के माध्यम से 6727 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है। वर्ष 2023-24 से मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के तहत गंगा के 5 किमी. कॉरिडोर में 39 नए क्लस्टरों (1950 हे.) में नमामि गंगे प्राकृतिक कृषि कॉरिडोर योजना राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन की गाइडलाइन के अनुरूप संचालित की जा रही है।
कलस्टर स्तर पर संचालित हो रही कई गतिविधियां
क्लस्टर स्तर पर चैम्पियन किसान एवं कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) का चयन, प्रशिक्षण, एक्सपोजर भ्रमण, फार्मर फील्ड स्कूल, ऑन फार्म निवेश, मृदा परीक्षण, पंजीकरण, प्रमाणीकरण एवं विपणन जैसी गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024-25 से केंद्र पोषित नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत 11 जनपदों—पौड़ी, देहरादून, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा एवं उधम सिंह नगर के 10,000 है. क्षेत्र को शामिल किया गया है।

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