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महिला आरक्षण विरोधी दलों को सजा देने का क्रम उत्तराखंड में भी जारी रहेगा : महेंद्र भट्ट , कहा – बंगाल व असम के बाद महिलाएं, 27 में नारी विरोधी कांग्रेस का सूपड़ा करेंगी साफ

बंगाल के परिणामों से स्पष्ट, राष्ट्र एकता और संस्कृति संवर्धन देश की प्राथमिकता
देहरादून। भाजपा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वाली पार्टियों को देश की जनता ने सबक सिखाना शुरू कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कहा, इसकी शुरुआत बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनाव से हुई है। अब देवभूमि भी महिला विरोधी कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए बेसब्री से 27 के चुनावों का इंतजार कर रही है। इस बार कांग्रेस का प्रदेश से पूरी तरह सूपड़ा साफ होना तय नजर आ रहा है। 
उन्होंने 5 राज्यों, विशेषकर बंगाल चुनावों परिणामों का राज्य में असर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नतीजे बताते हैं कि महिला अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।
​उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों द्वारा महिला सशक्तिकरण के प्रयासों में रोड़े अटकाने से उत्तराखण्ड की मातृशक्ति में भी भारी आक्रोश है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा:
​”देवभूमि की जागरूक महिलाएं कांग्रेस के महिला विरोधी चरित्र को पहचान चुकी हैं। अब राज्यों के हालिया चुनाव परिणाम से उनका ये मत मजबूत हुआ है कि महिला विरोधी पार्टियां स्वीकार नही। लिहाजा, 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता कांग्रेस को करारा जवाब देगी और उनका सूपड़ा साफ होना पूरी तरह तय है।”भट्ट ने कहा कि बंगाल और असम जैसे राज्यों के परिणाम ये भी बताते हैं कि जनता अब केवल विकास, सुशासन और जनकल्याण के लिए ही वोट देती है। 
​उन्होंने उत्तराखण्ड की चर्चा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सौ फीसदी क्षमता और ईमानदारी के साथ जन-आकांक्षाओं को पूरा कर रही है। हमारी डबल इंजन सरकार की सरकार विकास, विरासत और देवभूमि की विशिष्ट छवि को बनाए रखने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के परिणाम न केवल कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाले हैं बल्कि यह जनता के उस भरोसे को भी मजबूत करते हैं कि वे एक सही पार्टी के साथ ‘विकसित उत्तराखण्ड’ के निर्माण में सहभागी हैं। उन्होंने दोहराया कि भाजपा अंत्योदय के मंत्र के साथ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिस पर जनता आगे भी अपनी मुहर लगाने वाली है।  

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