नीट यूजी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में एसआईटी ने आरोपी धीरज कुमार को किया गिरफ्तार, कार से 5.58 लाख नकद बरामद

मध्य प्रदेश के भोपाल से की गई गिरफ्तारी
देहरादून।नीट यूजी-2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव को मध्य प्रदेश के भोपाल से गिरफ्तार किया। उसके वाहन से 5.58 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, यह रकम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी गई थी। मामले में थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में 13 सितंबर 2026 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के संबंध में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। थाना रायपुर में मुकदमा और थाना क्लेमेंटाउन में मुकदमा दर्ज किया गया।
एसआईटी ने की दस्तावेजों की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। जांच के दौरान टीम ने संबंधित दस्तावेज और शिक्षण संस्थानों से जुड़े रिकॉर्ड कब्जे में लिए। जांच में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। शिक्षण संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर उनके वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई गई।पुलिस के मुताबिक, इससे पहले 21 सितंबर को मामले में रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है। रूपेश पंडित की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में लिए गए आठ लाख रुपये बरामद किए गए थे।
भोपाल में चलाता था एडमिशन का दफ्तर
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव भोपाल के इंद्रपुरी क्षेत्र में एमबीबीएस वे’ नाम से कार्यालय चलाता था। वह निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम करता था।पूछताछ में सामने आया कि धीरज की मुलाकात करीब दो वर्ष पहले रूपेश पंडित से उत्तरकाशी स्थित एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इसके बाद दोनों लगातार संपर्क में थे।
तीन अभ्यर्थियों के बनवाए फर्जी प्रमाण पत्र
पुलिस के मुताबिक, अरविंद कुमार ने अपनी बेटी और दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस दाखिले के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। इसके बाद रूपेश ने धीरज से बात की। आरोप है कि कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों के एमबीबीएस दाखिले के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे का विकल्प बताया गया। इसके बाद धीरज, रूपेश और उनके अन्य साथियों ने कथित तौर पर तीनों अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।
कार से 5.58 लाख बरामद
पुलिस ने धीरज श्रीवास्तव को वाहन संख्या एमपी-04-वाई-0655 (टाटा नेक्सॉन) के साथ गिरफ्तार किया। वाहन की तलाशी में 5,58,100 रुपये नकद बरामद हुए। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में धीरज ने बताया कि यह रकम उसे रूपेश पंडित ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से कुछ छात्रों को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी।
मामले में अब तक पुलिस 13,58,100 रुपये नकद बरामद कर चुकी है। एसआईटी प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। आरोपी की पहचान धीरज कुमार श्रीवास्तव (37) पुत्र दिवाकर कुमार श्रीवास्तव, निवासी हाउस नंबर 61, खजूरी कलान रोड, थाना पिपलानी, जिला भोपाल, मध्य प्रदेश। के रूप में हुई है।




