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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने साधा निशाना – कहा , एसआईआर रोकने की मांग, संवैधानिक प्रक्रिया से जीतने में असफल लोगों की हताशा

कहा – बिना वैध कागज, मतदाता बनाने की कांग्रेसी मांग, देशद्रोह जैसी ,
हार की खामियां दूर करने के बजाय चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता समाप्त करना चाहती है कांग्रेस 
देहरादून । भाजपा ने एसआईआर रोकने की विपक्षी आंदोलन की मांग को संवैधानिक प्रक्रिया से जनता का विश्वास जीतने में असफल लोगों की हताशा बताया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया कि जो चाहते हैं बिना वैध कागजों के मतदाता बनाए जाएं वे देशद्रोह कर रहे हैं। कांग्रेस अपनी हार की खामियां दूर करने के बजाय पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ही समाप्त करना चाहती है।
उन्होंने एसआईआर रोकने और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर कल (आज) से होने वाले विपक्षी आंदोलन को राजनैतिक पाखंड बताया है। वहीं हैरानी जताते हुए पूछा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां क्यों विरोध कर रही हैं? क्या वे चाहते हैं कि उत्तराखंड के मतदाताओं की शुद्ध सूची नहीं बने? क्या वे चाहते हैं कि घुसपैठिए एवं अवैध लोग मतदाता बनकर राज्य की सरकार का चयन करें? क्या विपक्ष चाहता है देवभूमि की डेमोग्राफी बरकरार नहीं रहे? यदि कोई ऐसा चाहता है तो वो लगभग देशद्रोह की कोशिश जैसा है।
उन्होंने तंज कसा कि जो पिछले 60 वर्षों तक चुनाव आयोग को जेब में रखकर वोटों की चोरी से सरकार बनाते रहे। जिन्होंने देश में आपातकाल लागू कर लोकतांत्रिक अधिकारों पर डकैती डालने का पाप किया। हैरानी है कि वही लोग, मोदी  द्वारा पारदर्शी एवं जवाबदेह चुनाव आयोग गठित करने के बाद आज झूठे आरोप लगाकर विरोध कर रहे हैं। जबकि सच यह है कि चोरी करने वाले लोगों को ही सब लोग चोर ही नजर आते हैं। ठीक ऐसा ही कांग्रेस को लगता होगा कि जैसे उन्होंने हमेशा वोटों की चोरी कर सरकार बनाई हैं, वैसे ही अब भी हो रहा होगा। जबकि देश और प्रदेश की जनता ने देखा है कि किस तरह सरकार में आते ही मोदी जी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नियम बनायें और लम्बे समय से लंबित संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इस सबके बाद देश में चुनाव प्रक्रिया पूर्णतया पारदर्शी और ईमानदार हुई तो कांग्रेस एवं विपक्ष को अब जीतना असंभव लग रहा है। यही वजह है कि अब विपक्ष नकारत्मक राजनीति की पराकाष्ठा पार करते हुए, समूची चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता धूमिल कर रहा है।
उन्होंने कहा, न्यायपालिका, कार्यपालिका, पत्रकारिता, चुनाव आयोग एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर हमले करने वालों को जनता अच्छी तरह पहचान गई है। लिहाजा लाख प्रोपेगेंडा करे कांग्रेस, जनता उनके झांसे में नहीं आने वाली और 2027 में इन सबको पुनः तीसरी बार मुंह की खानी पड़ेगी।

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