उत्तराखण्डदेहरादून

डोईवाला के स्क्रीनिंग प्लांट में मृत मिली बालिका के केस की करवाई जाएगी पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच : डॉ गीता खन्ना

केशवपुरी बस्ती डोईवाला पहुंचकर स्क्रीनिंग प्लांट में मृत मिली बालिका के परिजनों से की बाल आयोग अध्यक्ष ने मुलाकात, पीड़ित परिवार को दिलाई जाएगी हर संभव विधिक सहायता
देहरादून ।उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना के नेतृत्व में उनकी टीम सचिव डा. एसके बरनवाल, अनु सचिव डा. एसके सिंह, एवं बाल मनोवैज्ञानिक डा. निशात इक़बाल ने देहरादून जनपद के डोईवाला स्थित केशवपुरी बस्ती, मजनूवली गली  जाकर स्क्रीनिंग प्लांट में मृत मिली नाबालिग बालिका के मामले का स्वत संज्ञान लेते हुए स्थल निरुक्षण किया गया। इस घटना के कारण इलाके के लोगों में  शोक और आक्रोश महसूस किया गया।
इस सम्बन्ध में आयोग की अध्यक्ष डॉ. खन्ना ने पीड़ित परिजनों से संवेदना व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि इस मामले में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने जिला प्रशासन एवं पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पीड़ित परिवार को हरसंभव समुचित विधिक सहायता सरकार की और से प्रदान की जाए।
परिवार से बातचीत के दौरान आयोग की अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने पुलिस अधिकारियों से विशेष रूप से यह प्रश्न किया  कि देहरादून में अन्य क्षेत्रों से काम के लिए आने वाले बाहरी व्यक्तियों  का सत्यापन किस प्रकार से किया जा रहा है। यह चिंता प्रकट की गई कि पड़ोसी जिलों से आने वाले कई व्यक्तियों की गतिविधियाँ संदिग्ध पाई जा रही हैं, जो राज्य में अवैध एवं आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाते हैं।
आयोग ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया कि बाहरी राज्यों से आकर कार्यरत प्रत्येक श्रमिक का सघन सत्यापन एवं रिकॉर्ड मेन्टेन  किया जाए तथा जिस जगह से वह आ रहे हैं वहां से भी उनके अपने क्षेत्र को छोड़ने का कारण जाना जाए ताकि राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक शांति को कोई आघात न पहुंचे एवं पुनरावृति को रोका जा सके। साथ ही बाल आयोग अध्यक्ष ने वहां मोजूद सभी लोगों को किसी भी मुश्किल या परेशानी में सरकार के संचालित हेल्पलाइन नंबर  100, 112, 1098 पर कॉल कर सहायता प्राप्त करने की सलाह दी गई।

स्थलीय निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम को एक अत्यंत कुपोषित  बालिका दिखी, जो संभवतः क्वाशिओरकर जैसी गंभीर पोषण समस्या से पीड़ित थी। इस पर बाल आयोग अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने  तत्काल स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया  कि वे इस बस्ती सहित आसपास के क्षेत्र के सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करवाएं और जिन बच्चों को आवश्यकता हो, उन्हें पोषण आधारित सरकारी योजनाओं , प्रोग्राम व अन्य सभी से जोड़कर प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम सप्लीमेंटेशन दिया जाए। इससे संबंधित आंगनवाड़ी को भी निर्देशित किया गया।
छोटी बच्ची को प्रताड़ित करने के मामले की जांच आख्या तलब
आयोग के संज्ञान में एक अन्य प्रकरण आया है, जिसमें खुरबुरा इलाके में एक व्यक्ति  आते जाते लोगों को अलग-अलग प्रकार से परेशान करता है एवं आते जाते वह कई महिलाओं को छेड़ भी चुका है। हाल ही में एक छोटी बच्ची को भी प्रताड़ित किया। चौकी इंचार्ज को इस प्रकरण की सम्पूर्ण जांच आख्या आयोग को प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया। आसपड़ोस के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार इस व्यक्ति का भी सम्पूर्ण मानसिक चिकित्सकीय जांच कराने की आवश्यकता पर भी सुझाव दिया गया।
आयोग ने स्पष्ट किया  कि किसी भी नागरिक की मानसिक स्थिति को केवल इसलिए टालना की वह मानसिक विक्षिप्त है, यह न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। यदि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो आयोग स्वतः संज्ञान लेकर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति करेगा।

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